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सोडियम और पोटेशियम को मिट्टी के तेल में क्यों रखा जाता है

सोडियम (Sodium) और पोटेशियम (Potassium) एक रासायनिक तत्त्व है। यह एक अत्यंत सक्रिय तत्व है जिसके कारण यह मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है। यह सभी स्थानों पर मिश्रित रूप में पाया जाता है। इसका सबसे आम यौगिक सोडियम क्लोराइड या नमक है। समुद्र के पानी में घुले यौगिकों में इसकी मात्रा 80% तक रहती है। इसकी कई जगहों पर खदानें भी हैं, जैसे की भारत में यह राजस्थान की सांभर झील में यह बड़ी मात्रा में मौजूद है, वही इसकी बड़ी खदान पाकिस्तान में भी मौजूद है। इस लेख में हम सोडियम और पोटेशियम को मिट्टी के तेल में क्यों रखा जाता है जानेंगे।

सोडियम को मिट्टी के तेल में क्यों रखा जाता है

सोडियम कार्बोनेट क्षारीय मृदा में सोडियम कार्बोनेट पाया जाता है। इसके अलावा सोडियम के कई यौगिक जैसे सोडियम सल्फेट, नाइट्रेट, फ्लोराइड आदि विभिन्न स्थानों पर पाए जाते हैं। जर्मनी के सैक्सोनी क्षेत्र में स्टेसफर्ट की खदानें एक अच्छा स्रोत हैं। सोडियम सभी खनिजों और चट्टानों में सिलिकेट के रूप में मौजूद होता है, हालांकि इसका प्रतिशत छोटा रहता है।

सोडियम और पोटेशियम को मिट्टी के तेल में क्यों रखा जाता है

सोडियम और पोटेशियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है क्योंकि यह अत्यधिक क्रियाशील धातु है। यदि इसे एक खुले कंटेनर में रखा जाता है, तो यह वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन और जल वाष्प के साथ क्रमशः सोडियम ऑक्साइड और सोडियम हाइड्रॉक्साइड पैदा करता है, जो एक अत्यधिक एक्सोथर्मिक प्रतिक्रिया है।

हमारे हाथों से नमी के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है, इसलिए हमे इसका इस्तेमाल सावधानी से करना होता है। मिट्टी का तेल सोडियम के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है और एक अवरोध के रूप में कार्य करता है जो ऑक्सीजन और नमी के साथ इसकी प्रतिक्रिया को प्रतिबंधित करता है। वास्तव में, सामान्य परिस्थितियों में मिट्टी का तेल हवा या ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है। हालांकि, ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करने के लिए, मिट्टी के तेल को या तो 300* C के सामान्य दबाव के आसपास या कम तापमान पर पर्याप्त उच्च तापमान की आवश्यकता होती है।

सोडियम एक चमकदार धातु है। हवा में ऑक्सीकरण के कारण यह जल्दी ही जम जाता है। यह एक नरम धातु और एक अच्छा विद्युत चालक है क्योंकि इसके परमाणु के सबसे बाहरी कोश में मौजूद इलेक्ट्रॉन एक परमाणु से दूसरे परमाणु में बहुत जल्दी गति कर सकता है। सक्रिय पदार्थ होने के कारण सोडियम धातु का निर्माण अधिक समय तक सफल नहीं हो सका। 1807 ई. में, अंग्रेजी वैज्ञानिक डेवी ने सबसे पहले इस तत्व को तरल सोडियम Hydroxide के Electrolysis द्वारा बनाया था। वर्ष 1890 में केस्टनर ने इस पद्धति का औद्योगीकरण किया।

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