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वीटो पावर क्या होता है

रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते फिर से वीटो का मुद्दा गर्म हो चुका है। Ukraine और Russia के युद्ध के खिलाफ अमेरिका और फ्रांस समेत कई देशों ने UNSC में आपात बैठक बुलाई थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी यूक्रेन में रूसी सेना को आगे बढ़ने से नहीं सकते हैं। क्योंकि रूस के पास भी ‘Veto Power‘ है। इससे पहले चीन ने आतंकी मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने में वीटो का इस्तेमाल किया था। इस लेख में हम, वीटो पावर क्या होता है जानेंगे।

वीटो पावर क्या है

वीटो पावर क्या है

वीटो पावर का अर्थ है कि कोई व्यक्ति, संस्था या देश निर्णय या कानून को रोक सकता है। उदाहरण के लिए, United Nations Security Council (UNSC) में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, चीन, रूस और फ्रांस इन पांच स्थायी सदस्यों में से प्रत्येक के पास वीटो पावर है। इसका उपयोग करके, वे सुरक्षा परिषद के निर्णयों को पारित होने और प्रस्ताव बनने से रोक सकते हैं जब तक कि वे सभी उनसे सहमत न हों। आसान भाषा में, अगर 5 सदस्यों में से कोई एक भी इसे वीटो करता है, तो मौजूद प्रस्ताव खारिज कर दिया जाएगा। भारत, जापान और ब्राजील जैसे कई देश भी सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता यानी वीटो पावर की मांग कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानि UNSC, संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है। यह संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली संगठन है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार है। कुछ मामलों में UNSC अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने या बहाल करने के लिए प्रतिबंध लगाने या बल के उपयोग का सहारा ले सकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर महीने बदलती है और अंग्रेजी में वर्णानुक्रम में होती है। वर्तमान में रूस इसकी अध्यक्षता कर रहा है। इसके पांच स्थायी सदस्य हैं। इनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन शामिल हैं। इसके साथ ही हर दो साल पर 10 अस्थायी सदस्यों का भी चयन किया जाता है। वर्तमान में, India, Brazil, Albania, Gabon, Ghana, Ireland, Kenya, Mexico, Norway, United Arab Emirates संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य हैं।

भारत में, राष्ट्रपति के पास तीन वीटो शक्तियां हैं, यानी – सहमति, असहमति और निर्णय को रोके रखना। राष्ट्रपति अगर किसी विधेयक से सहमत है तो उसपर स्वाक्षरी कर उसे मान्यता दे सकते है, अगर उन्हे लगता है की उसमें बदलाव किया जाना जरूरी है, तो राष्ट्रपति संशोधन के लिए विधेयक को वापस संसद में भेज सकते हैं, जो असहमति का वीटो अधिकार है। लेकिन संसद द्वारा पुनर्विचार किया गया विधेयक 14 दिनों के बाद राष्ट्रपति की सहमति से या उसके बिना कानून बन जाता है।

आखरी है – किसी विधेयक को रोके रखना, राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अनिश्चित काल के लिए कोई कार्रवाई नहीं करते है, जिसे कभी-कभी पॉकेट वीटो भी कहा जाता है। राष्ट्रपति द्वारा अपने पॉकेट वीटो का प्रयोग करने पर विधेयक को अनिश्चित काल के लिए लंबित रखा जा सकता है। ऐसे स्थिति में वह न तो विधेयक को अस्वीकार करते है और न ही विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाते है।

भारत में, संविधान राष्ट्रपति को कोई समय-सीमा नहीं देता है जिसके भीतर उसे विधेयक पर कार्य करना होता है। इसलिए, राष्ट्रपति अपने पॉकेट वीटो का उपयोग करता है जहां उसे बिल पर कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं होती है। अमेरिकी में इसके के विपरीत, राष्ट्रपति जिन्हें 10 दिनों के भीतर बिल को फिर से भेजना होता है, भारतीय राष्ट्रपति के पास ऐसा कोई समय-नियम नहीं है।

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