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त्रिपिटक क्या है – Tripitak Kya Hai

Tripitak Kya Hai: वर्तमान त्रिपिटक वही त्रिपिटक है जिसके बारे में माना जाता है कि इसे सिंहल के राजा वट्टागमनी के समय पहली शताब्दी ई. के अंत में बसाया गया था। बौद्ध विद्वानों ने उक्त त्रिपिटक की अनेक व्याख्याएं आदि लिखी हैं, जिन्हें अठकथा (अर्थकथा) के नाम से जाना जाता है। आठ कहानियाँ भी पाली भाषा में हैं। कहा जाता है कि जब महेन्द्र स्थविर बुद्ध शासन स्थापित करने के लिए सिंहल गए थे, तो वे त्रिपिटक के साथ अपनी अट्ठकथाएँ भी लेते गये। अगर आप त्रिपिटक क्या है उनके नाम और संख्या में कितने है नहीं जानते तो हम इस आर्टिकल आसान भाषा में बताने जा रहे है।

त्रिपिटक क्या है

त्रित्रिपिटक क्या है – Tripitak Kya Hai

त्रिपिटक बौद्ध धर्म का मुख्य ग्रंथ है जिसे सभी बौद्ध संप्रदाय मानते हैं। यह बौद्ध धर्म का सबसे पुराना ग्रंथ है जिसमें भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को संग्रहित किया गया है। यह पुस्तक पाली भाषा में लिखी गई है और विभिन्न भाषाओं में अनुवादित है। इस ग्रंथ में भगवान बुद्ध द्वारा बुद्धत्व प्राप्ति के समय से लेकर महापरिनिर्वाण तक के प्रवचनों का संकलन किया गया है। त्रिपिटक की रचना अवधि या निर्माण अवधि 100 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक है। और सभी त्रिपिटक सिहल देश यानी श्रीलंका में लिखे गए थे और उनकी भाषा में लिखे गए थे।

त्रिपिटक के नाम और संख्या

त्रिपिटक की संख्या 3 है, जिनके नाम विनयपिटक, सुत्तपिटक और अभिधम्म पिटक है। इनका विस्तार इस प्रकार है।

1.  विनयपिटक

  1. सुत्तविभंग (पाराजिक, पाचित्तिय)
  2. परिवार
  3. पातिमोक्ख
  4. खन्धक (महावग्ग, चुल्लवग्ग)

2. सुत्तपिटक

  1. दीघनिकाय
  2. मज्झिमनिकाय
  3. संयुत्तनिकाय
  4. अंगुत्तरनिकाय
  5. खुद्दकनिकाय
  6. विमानवत्थु
  7. पेतवत्थु
  8. थेरगाथा
  9. थेरीगाथा
  10. खुद्दक पाठ
  11. धम्मपद
  12. उदान
  13. इतिवुत्तक
  14. सुत्तनिपात
  15. जातक
  16. निद्देस
  17. पटिसंभिदामग्ग
  18. अपदान
  19. बुद्धवंस
  20. चरियापिटक

3. अभिधम्मपिटक

  1. धम्मसंगणि
  2. विभंग
  3. पुग्गलपंञति
  4. कथावत्थु
  5. यमक
  6. धातुकथा
  7. पट्ठान

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