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शेखर एक जीवनी क्या है? जानिये वह लेखक कौन थे !!

‘शेखर एक जीवनी’ अज्ञेय का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला उपन्यास है। यह हिन्दी की एक ऐसी कहानी-कृति है जिसे प्रकाशन के समय से ही हर पीढ़ी का प्यार मिला है। साहित्य में रुचि रखने वाला छात्र हो या आम पाठक, इससे गुजरने के बाद जीवन की भरी-भरी नदी में डूबने का मन करता है। उपन्यास का नायक शेखर चाहे स्वयं अज्ञेयवादी हो या कोई और, यह हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है। इस लेख में हम, शेखर एक जीवनी क्या है और सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अग्नेय के जीवन के बारें में में भी संक्षिप्त में जानेंगे।

शेखर एक जीवनी क्या है

शेखर एक जीवनी क्या है

शेखर एक जीवनी सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय का मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है। इसके दो भाग हैं। पहला भाग 1941 में प्रकाशित हुआ था और दूसरा भाग 1944 में प्रकाशित हुआ था। इसमें अज्ञेय ने बच्चे पर काम, अहम और भय और उसके स्वभाव के प्रभाव पर मनोवैज्ञानिक रूप से विचार किया है। सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अग्नेय’ (7 मार्च, 1911 – 4 अप्रैल, 1987) एक कवि, स्टाइलिस्ट, कहानीकार, ललित-निबंध लेखक, संपादक और शिक्षक के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने कथा साहित्य को एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया।

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन कौन थे

सच्चिदानंद का जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर प्रदेश के कसाया में एक पुरातात्विक-खुदाई शिविर में हुआ था। बचपन लखनऊ, कश्मीर, बिहार और मद्रास में बीता। बीएससी अंग्रेजी में एमए कर क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल होते हुए बम बनाते पकड़े गए और वहां से भाग भी गए। 1930 ई. के अंत में वह पकड़े गए। वे ऐसे कवि हैं जिन्होंने साहित्य जगत में अज्ञेयवादी प्रयोगवाद और नवीन काव्य की स्थापना की है।

अनेक जापानी हाइकु कविताओं को अज्ञेय ने अनूदित किया। बहुआयामी व्यक्तित्व के एकान्त, प्रखर कवि होने के साथ-साथ वे एक अच्छे फोटोग्राफर और सत्य की खोज करने वाले पर्यटक भी थे। 1930 से 1936 तक विभिन्न जेलों में बिताया। 1936-37 में सैनिक और विशाल भारत पत्रिकाओं का संपादन किया। 1943 से 1946 तक ब्रिटिश सेना में सेवा दी; इसके बाद इलाहाबाद से प्रतीक नाम की एक पत्रिका निकाली और ऑल इंडिया रेडियो की नौकरी स्वीकार कर ली।

सच्चिदानंद ने देश-विदेश में भ्रमण किया। जिसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से लेकर जोधपुर यूनिवर्सिटी तक पढ़ाया। दिल्ली लौटकर दिनमान साप्ताहिक, नवभारत टाइम्स, अंग्रेजी पत्र वाक और एवरीमैन जैसी प्रसिद्ध पत्रिकाओं का संपादन किया। 1980 में उन्होंने वत्सलनिधि नाम के एक ट्रस्ट की स्थापना की, जिसका उद्देश्य साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में काम करना था। 4 अप्रैल 1987 को दिल्ली में ही उनका निधन हो गया।

इस लेख में हमने, शेखर एक जीवनी क्या है को जाना। बाकी ज्ञानवर्धक जानकारी केलिए नीचे दिए गए लेख पढ़े:

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