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संसदीय सचिव क्या होता है | Sansadiya Sachiv Kya Hota Hai

Sansadiya Sachiv Kya Hota Hai: कई बार राज्यों में यह पद उन विधायकों को दिया जाता है जो मंत्री पद नहीं मिलने से नाखुश हैं। संसदीय सचिव को राज्य मंत्री या कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाता है। उन्हें सभी सुविधाएं मंत्री के रूप में ही मिलती हैं। लेकिन क्या राज्य सरकारों का ऐसा करना सही है? क्या एक विधायक को खुश करने के लिए जनता का पैसा बर्बाद करना उचित है? अगर आप नहीं जानते की संसदीय सचिव क्या होता है? तो हम इस आर्टिकल में इसकी विस्तार से जानकारी देने जा रहे है।

संसदीय सचिव क्या होता है

संसदीय सचिव क्या होता है

संसदीय सचिव का पद वित्तीय लाभ का पद होता है। वह अपने काम में किसी भी मंत्री की मदद करता है जिससे वह जुड़ा होता है। बदले में उन्हें वेतन, कार और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। संसदीय सचिव एक प्रकार से जिस मंत्री से वह जुड़े हुए हैं, उनके लगभग सभी कार्यों में उनकी सहायता करता है। मंत्री किसी भी व्यक्ति को अपना संसदीय सचिव नियुक्त कर सकता है।

संसदीय सचिव का पद वित्तीय लाभ का पद होता है। संसदीय सचिव किसी भी मंत्री की मदद करता है जिससे वह जुड़ा होता है। बदले में उसे पैसे, कार जैसी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं।

यह ब्रिटिश व्यवस्था की देन है। इंग्लैंड में एक मंत्री संसद के उसी सदन में जा सकता है जिसका वह सदस्य है। इसलिए एक मंत्री को दोनों सदनों में काम करने के लिए संसदीय सचिव की आवश्यकता होती है। संसदीय सचिव अपने मंत्री की ओर से किसी भी सदन में जा सकता है।

भारत में मंत्री किसी भी सदन, लोकसभा या राज्यसभा में जा सकते हैं। मंत्रियों की मदद के लिए केंद्र में संसदीय कार्य मंत्रालय है, जो ऐसे काम देखता है। इसके तहत संसदीय सचिव आते हैं।

संसदीय सचिव लाभ का पद क्यों है

  1. लाभ के पद का अर्थ है कि लाभ के पद के मामले को इस तरह से समझा जा सकता है कि सरकार नियुक्ति, व्यक्तियों को हटाने या उनके प्रदर्शन को नियंत्रित करती है, तो यह लाभ का पद है।
  2. भले ही पद से जुड़ा वेतन या पारिश्रमिक हो, यह भी लाभ के पद का मामला बनता है।
  3. जिस स्थान पर यह नियुक्ति हुई है, वहां सरकार की ऐसी शक्ति होनी चाहिए जिसमें धनराशि जारी करना, भूमि आवंटन और लाइसेंस प्रदान करना शामिल हो।
  4. अगर ऑफिस ऐसा है जो किसी के फैसले को प्रभावित कर सकता है तो इसे लाभ का पद भी माना जाता है।

संविधान में क्या प्रावधान है

2003 में संविधान में एक संशोधन किया गया था। इस 91वें संशोधन के अनुसार, अनुच्छेद 164 (1A) जोड़ा गया था। इसमें कहा गया है कि किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री समेत कुल विधायकों में से सिर्फ 15 फीसदी ही मंत्री रह सकते हैं. यानी 100 विधायक हैं, तो कुल 15 मंत्री हैं। मतलब सबको मंत्री बनाकर पैसा बांटना बंद करो। दिल्ली के लिए अनुच्छेद 239(A) है। केवल 10 प्रतिशत मंत्री हो सकते हैं। यानी कुल 70 विधायकों में से सिर्फ 7 विधायक ही मंत्री रह सकते हैं।

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