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संध्या का दूसरा नाम क्या है

संध्या काल दो प्रकार का होता है। सूर्योदय के समय और अस्त होने के समय को संध्या काल कहते हैं। रात से दिन और दिन-प्रतिदिन के मिलन को संध्या काल कहा जाता है। उर्दू भाषा में इसे सहर कहते हैं। इस लेख में हम संध्या का दूसरा नाम क्या है जानेंगे।

संध्या का दूसरा नाम क्या है

संध्या का दूसरा नाम क्या है

संध्या का दूसरा नाम शाम है, जिसे हम अंग्रेजी में Evening कहते हैं। शाम एक निश्चित समय पर ही होती है। संध्या एक गुणवाचक विशेषण है। यह समय का गुण है। इसलिए यहाँ यह गुणवाचक संज्ञा है। संध्या का अर्थ जीवन के परवर्ती काल से भी लिया जाता है। संध्या का एक अन्य अर्थ बीतने की आखिरी बेला को संध्या कहा जाता है। आसान शब्दों में संध्या का अर्थ है एक के जाने और दूसरे के आने के बीच की अवधि है।

अक्सर हम देखते हैं कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य हमें बड़ा दिखाई देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य बड़ा क्यों दिखता है? सूर्य हमारी पृथ्वी से 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम से बना है। आंतरिक सतह इसकी बाहरी सतह की तुलना में अधिक गर्म होती है।

सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में आठ मिनट उन्नीस सेकंड का समय लगता है। शाम के समय सूर्य के प्रकाश और कमजोर प्रकाश के कारण सूर्य हमें स्पष्ट और पूर्ण दिखाई देता है। लेकिन जब दोपहर के समय सूर्य पृथ्वी के ठीक ऊपर होता है, तो उसकी तेज किरणें पृथ्वी की ओर आती हैं। उन तेज किरणों के प्रभाव से हमें सूर्य का बाहरी भाग देखने की बजाय भीतरी भाग ही दिखाई देता है।

त्रिकाल संध्या

त्रिकाल संध्या एक प्रकार से योग साधना की एक विधि है, जिसमें साधक साधना के बाद प्राणायाम करता है। सूर्योदय और सूर्यास्त से पहले और बाद के समय को संध्या काल कहा जाता है।

हिंदू सनातन धर्म में ज्ञान और पूजा पद्धति अद्भुत है। भगवान के करीब आने के कई तरीके हैं। सबसे अच्छे तरीकों में से एक है त्रिकाल संध्या। त्रिकाल संध्या मनुष्य के मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक विकास के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। शाम को पूजा करने वाले व्यक्ति का मन और बुद्धि भगवान से भर जाता है। दैनिक और नियमित संध्या वंदन हमें ईश्वर के करीब ले जाता है।

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