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सममिति किसे कहते हैं

सममिति (Symmetry) हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाला एक आम शब्द है। जब हम ऐसे आकृति या आकृतियों को देखते हैं जो बराबर संतुलित अनुपात में हों तब हम कहते हैं, ” ये आकृतियाँ सममित आकृतियाँ हैं। इस लेख में हम सममिति किसे कहते हैं जानेंगे।

सममिति किसे कहते हैं

सममिति किसे कहते हैं

एक आकृति में रैखिक (या रेख) सममिति होती है यदि उसे एक रेखा के अनुदिश मोड़ने पर, आकृति के बाएँ और दाएँ भाग एक – दूसरे के पूर्णतया संपाती हो जाएँ। यह रेखा उस आकृति की सममिति रेखा कहलाती है। हो सकता है कि किसी आकृति में कोई भी सममित रेखा न दो सममित रेखाएँ हों, तीन सममित रेखाएँ हों, इत्यादि हो।

एक सममित रेखा हो, रैखिक सममिति दर्पण परावर्तन से निकटतः संबंधित है। किसी बिंदु (या वस्तु) के प्रतिबिंब की सममित रेखा (दर्पण) से दूरी वही होती है, जो उस बिंदु की उस सममित रेखा से होती है। ज्यामिति बॉक्स में दिए उपकरणों का प्रयोग करते हुए अनेक रचनाएँ की जा सकती हैं।

अपनी सममित बनावट के कारण इन पुरातत्वीय आकृतियों ने अद्भुत स्थापत्य बना रखा है। कल्पना कीजिए हम एक आकृति को आधे (अर्ध) से इस तरह मोड़े कि उसका आधा बायाँ भाग तथा आधा दायाँ भाग एक दूसरे से पूर्णतया मिलता जुलता हो तब हम कहेगें कि आकृति में सममित रेखा उपस्थित है।

हम देख सकते हैं कि दोनों आधे भाग एक दूसरे के (दर्पण) प्रतिबिंब हैं। यदि हम आकृति के मोड़ने वाले स्थान पर एक दर्पण को रख देते हैं तो आकृति के एक भाग का प्रतिबिंब के दूसरे भाग को पूर्णतया ढक लेगा। ऐसा जब भी घटित होता है तो यह त या मोड़ (वास्तविक या काल्पनिक), जो दर्पण रेखा है, आकृति की सममिति रेखा (या सममित अक्ष) कहलाती है।

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