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राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में क्या अंतर है

क्या आप जानना चाहते हैं कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में क्या अंतर है, आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं। आप जानते ही होंगे कि पिछली बार भारत के पुराने राज्य जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद इसे दो नए केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटा गया है। जिसके बाद इन दोनों राज्यों की कानून व्यवस्था केंद्र सरकार के हाथ में आ गई।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में क्या अंतर है

केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले जम्मू-कश्मीर का अपना अलग मुख्यमंत्री हुआ करता था, इसके अलावा इस राज्य को कई विशेष शक्तियां भी दी जाती थीं। लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील कर दिया है। ऐसे में बहुत से लोग एक राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश के बीच अंतर जानना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं इसके बारे में।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में क्या अंतर है

भारत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का एक संघ है जिसमें वर्तमान में 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं। राज्यों के निर्माण के पीछे का कारण हम सभी जानते हैं क्योंकि क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत एक बहुत बड़ा देश है। ऐसे में इसके विकास में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए, इसलिए इसे अलग-अलग राज्यों में बांटा गया है, लेकिन भारत में केंद्र शासित प्रदेश बनाने का कारण बहुत कम लोग जानते हैं, तो आइए सबसे पहले इसका कारण जानते हैं।

केंद्र शासित प्रदेश के गठन के कई मुख्य कारण हैं जैसे छोटा आकार और छोटी आबादी, अलग संस्कृति, अन्य राज्यों से दूरी, प्रशासनिक महत्व, स्थानीय संस्कृतियों की रक्षा, शासन के मामलों से संबंधित राजनीतिक उथल-पुथल को दूर करना और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण परिस्थिति।

दिल्ली, चंडीगढ़ और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेश अन्य राज्यों से बहुत दूर हैं। इस कारण अन्य राज्यों के साथ आर्थिक और सामाजिक संबंध नहीं बनाए जा सकते। ऐसे में इन केंद्र शासित प्रदेशों में किसी भी आपात स्थिति को केंद्र सरकार ही संभाल सकती है।

भारत में सभी केंद्र शासित प्रदेशों का आकार इतना बड़ा नहीं है कि उन्हें पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सके। दिल्ली के अलावा अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की आबादी बहुत कम है और भूमि क्षेत्र भी एक राज्य की तुलना में बहुत कम है। इसलिए विधानसभा के गठन और उसके लिए मंत्रिपरिषद के गठन से राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

अब अंतर जानिये

  1. राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में सबसे बड़ा अंतर लॉ एण्ड ऑर्डर का होता है। राज्य के अधिकार में राज्य की पूरी पुलिस व्यवस्था आती है, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस राज्यपाल मतलब की केंद्र सरकार के हाथ में होती है।
  2. सरकार की बात करें तो राज्य में अपने लोगों की चुनी हुई सरकार होती है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र सरकार कार्यपालिका होती है।
  3. प्रशासन चलाने के मामले में मुख्यमंत्री राज्य में मुखिया होता है, जबकि केंद्र शासित प्रदेश में राज्यपाल के पास अधिकार ज्यादा होते है, राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  4. संवैधानिक रूप से प्रमुख व्यक्ति की बात करें तो राज्यपाल राज्य में होता है जबकि राष्ट्रपति केंद्र शासित प्रदेश में मुखिया होता है, उसे कार्यकारी प्रमुख भी माना जा सकता है।
  5. राज्यों में सत्ता की शक्ति केंद्र और राज्य सरकार के बीच विभाजित है जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में सारी शक्ति केंद्र सरकार के पास है।
  6. क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से राज्यों की तुलना में केंद्र शासित प्रदेशों का आकार छोटा है।
  7. जैसा कि उनके नाम से भी पता चलता है, राज्य एक ऐसी संगठित इकाई है जो एक सरकार (सरकार) के अधीन होती है। जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में ज्यादातर काम केंद्र सरकार और देश के राष्ट्रपति करते हैं.

तो अब आप समझ ही गए होंगे कि एक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में क्या अंतर होता है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में सबसे बड़ा अंतर लॉ एण्ड ऑर्डर का होता है। जो राज्य में मुख्यमंत्री तो कें. प्र. में केंद्र के हाथ होती है। आशा है की आपको यह जानकारी पसंद आई होगी।

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