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रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती है, जानें असल कारण

सबको कभी ना कभी रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती है यह सवाल पड़ता है .. हम आपको आज इसी के बारे मे विस्तार से जानकारी देने जा रहे है. हमारे देश मे ट्रांसपोर्ट के लिए ट्रेन सबसे बड़ा और आम साधन माना जाता है. रेल से रोज लाखों-करोड़ों लोग सफर करते है, और इस सफर मे लोग बदलते रहते है लेकिन ट्रेन और पटरी वही रहती है. ट्रेन को साफ रखना; उसका मेन्टेनस करना इसके लिए रेलवे का स्टाफ होता है. उसके साथ पटरी पर नजर रखना यह भी बड़ी जिम्मेदारी का काम होता है. उसके लिए भी रेलवे कर्मचारी पटरी का रखरखाव और जरूरत पड़ने पर पटरी की बदली का काम करते है.

भारतीय रेल सेवा अत्यंत विशाल और क्लिष्ट है जिसे मेन्टेनन्स् करना काफी बड़ी चुनौती होती है. ऐसे मे रेल की पटरी को धातु मे लगने वाले जंग से किस तरह बचाया जाता होगा, यह प्रश्न आम लोगों के मन मे आना स्वाभाविक है. आपने देखा होगा की आमतौर पर लोहे का सामान जंग से बचाने के लिए पेंट किया जाता है. लेकिन रेल पटरी पर किसी तरीके का पेंट नहीं लगाया जाता. यह पटरिया 24 घंटे आसमान के नीचे खुली रहती है, तो ऐसा क्या खास है जो इसमे जंग नहीं लगता?

रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती है

रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती है

दरसल, रेल की पटरिया बनाने मे स्टील और मेंगलॉय का प्रयोग होता है. इस मिश्रण को हेडफील्ड या मैंगनीज स्टील भी कहा जाता है. इस मिश्रण में 12% मैंगनीज और 1% कार्बन का भी समावेश होता है. इस धातुमिश्रित मिश्रण के कारण रेल पटरी का ऑक्सीकरण बहुत धीमे गति से होता है, इसी वजह से रेल की पटरी पर जंग नहीं लगती है.

अगर यह पटरी सामान्य लोहे से बना दी गई तो निश्चित तौर पर इसे जल्दी से जंग लग जाएगा और ऐसे मे पटरियों की उम्र भी घट जाएंगी तथा इसको बारबार बदलने मे ज्यादा पैसे भी खर्च आएगा. यही कारण है की इसे स्टील, मैंगनीज और कार्बन मिश्रण से जंग प्रतिरोधक बनाया जाता है. जब रेल का आविष्कार हुआ, उसके बाद रेल पटरियों मे लगने वाले जंग का विचार किया गया होगा. काफी शुरुवाती दौर से ऐसे धातुमिश्रित पटरिया का निर्माण हो रहा है. अंग्रेजों के जमाने से आजतक वही पटरियों का प्रयोग होता आ रहा है. वैसे भी अंग्रेजों के जमाने के पूल और ट्रेन आजतक हमारे देश मे मौजूद है, जो उनके बेहतर तकनीक और भ्रष्टाचार से दूर निर्माण का सबूत है.

अब आप जन गए होंगे की रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती है .. वैसे भारत मे मौजूद रेल व्यवस्था अब 160 साल से पुरानी हो चुकी है. पहली ट्रेन मुबाई से ठाणे वर्ष 1853 मे चली थी. आज भारत मे 67,000 किलोमीटर रेलमार्ग, प्रतिदिन 13,000 से ज्यादा चलनी वाली ट्रेन और 7,000 से ज्यादा रेलवे स्टेशन विशाल नेटवर्क स्थापित हुआ है जो आशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है.

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