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प्राइमरी एवं सेकेंडरी डाटा स्टोरेज क्या होता है

कंप्यूटर भाषा में डेटा सूचनाओं, तथ्यों और आंकड़ों का एक संग्रह है, जिसे व्यवस्थित और अव्यवस्थित दोनों तरीकों से एकत्र किया जाता है। जिसे कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस किया जाता है और आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाती है। अर्थात सभी प्रकार की जानकारी जिसे कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस किया जा सकता है, डेटा कहलाती है। आँकड़ों के संग्रहण के आधार पर आँकड़े दो प्रकार के होते हैं – Primary Data and Secondary Data Storage। इस लेख में हम प्राइमरी एवं सेकेंडरी डाटा स्टोरेज क्या होता है जानेंगे।

प्राइमरी एवं सेकेंडरी डाटा स्टोरेज क्या होता है

प्राइमरी डाटा स्टोरेज क्या होता है

डेटा स्टोरेज एक कंप्यूटर की बुनियादी कार्यक्षमता है जिसे प्राइमरी और सेकेंडरी स्टोरेज में बांटा गया है। प्राइमरी डाटा स्टोरेज से तात्पर्य कंप्यूटर या मेन मेमोरी के मुख्य स्टोरेज से है जो रैंडम एक्सेस मेमोरी या रैम है।

जब कोई डेटा किसी संगठन या शोधकर्ता द्वारा पहली बार शुरू से अंत तक एकत्र किया जाता है, तो ऐसे डेटा को प्राथमिक डेटा कहा जाता है। यह मूल डेटा है, यानी जो डेटा पहली बार नए सिरे से एकत्र किया जाता है, उसे Primary Data कहा जाता है।

इसमें भारत की जनसंख्या का डेटा स्टोरेज या किसी स्कूल के सभी बच्चों का डेटा भी शामिल हो सकता है।

  1. इसे नए सिरे से इकट्ठा किया जाता है।
  2. Primary Data एकत्र करने में बहुत पैसा खर्च किया जाता है।
  3. प्राइमरी डेटा बहुत सटीक है।
  4. प्राइमरी डेटा बहुत उपयुक्त है।
  5. प्राथमिक आंकड़े बहुत विश्वसनीय होते हैं।
  6. लेकिन इसमें बहुत समय भी लगता है।
  7. साथ ही मैन पावर की भी जरूरत होती है, यानी लोगों की भी जरूरत होती है।
  8. आंकड़े एकत्रित करने में भी कठिनाई होती है।

सेकेंडरी डाटा स्टोरेज क्या होता है

सेकेंडरी डाटा स्टोरेज, बाहरी स्टोरेज डिवाइस को संदर्भित करता है जो डेटा को दीर्घकालिक आधार पर स्टोर करने के लिए उपयोग किया जाता है।

सेकेंडरी डेटा स्टोरेज में Secondary Data वह डेटा है जो किसी संगठन या शोधकर्ता द्वारा पहले ही एकत्र किया जा चुका है और नया शोधकर्ता पहले से एकत्रित डेटा का उपयोग करके नई जानकारी तैयार करता है।

उदाहरण के लिए, यदि आपके पास पहले से ही भारत की जनसंख्या का डेटा है, तो आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपके शहर में कितने प्रतिशत लोग साक्षर हैं और कितने प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। लेकिन आपको वह डेटा भारत की जनसंख्या के डेटा से पहले ही एकत्र किया जा चुका है, इसलिए इस डेटा को सेकेंडरी डेटा कहा जाएगा।

  1. एकत्रित डेटा का उपयोग कोई और करता है।
  2. Secondary Data एकत्र करने में बहुत कम पैसा खर्च होता है।
  3. सेकेंडरी डाटा बहुत कम सटीक होते हैं।
  4. सेकेंडरी डाटा को बहुत उपयुक्त नहीं माना जाता है।
  5. Secondary Data बहुत कम विश्वसनीय होते हैं।
  6. इसमें समय भी बहुत कम खर्च होता है, क्योंकि यह पहले से तैयार होता है।
  7. लोगों की जरूरत नहीं है।
  8. डेटा एकत्र करने में भी कुछ कठिनाई होती है।

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