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प्राकृतिक वनस्पति क्या है

पौधे या वनस्पति का अर्थ है किसी क्षेत्र का वनस्पति जीवन या भूमि पर वनस्पति और किसी विशिष्ट प्रजाति, जीवन के रूप, संरचना, स्थानिक प्रसार या अन्य वनस्पति या भौगोलिक विशेषताओं को संदर्भित नहीं करता है। यह शब्द वनस्पति शब्द से बहुत बड़ा है जो विशेष रूप से प्रजातियों की संरचना को संदर्भित करता है। इस लेख में हम प्राकृतिक वनस्पति क्या है या Natural Vegetation किसे कहते हैं और इसके कारक और प्रकार जानेंगे।

प्राकृतिक वनस्पति क्या है

प्राकृतिक वनस्पति क्या है

प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है ऐसी वनस्पति जो मनुष्य द्वारा विकसित नहीं की गई है। इसे इंसानों की मदद की जरूरत नहीं होती है और इसे जो भी पोषक तत्व चाहिए वह प्राकृतिक वातावरण से लेता है। जमीन की ऊंचाई और वनस्पति की विशेषता के बीच घनिष्ठ संबंध है। जलवायु परिवर्तन ऊंचाई में परिवर्तन के साथ होता है और जिसके कारण प्राकृतिक वनस्पतियों की प्रकृति में परिवर्तन होता है।

प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है ऐसी वनस्पति जो मनुष्य द्वारा विकसित नहीं की गई है। इसे इंसानों की मदद की जरूरत नहीं होती है और इसे जो भी पोषक तत्व चाहिए वह प्राकृतिक वातावरण से लेता है। जमीन की ऊंचाई और वनस्पति की विशेषता के बीच घनिष्ठ संबंध है।

जलवायु परिवर्तन ऊंचाई में परिवर्तन के साथ होता है और जिसके कारण प्राकृतिक वनस्पतियों की प्रकृति में परिवर्तन होता है। वनस्पति का विकास तापमान और नमी पर निर्भर करता है। यह मिट्टी की मोटाई और ढलान जैसे कारकों पर भी निर्भर करता है। इसे तीन व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: वन, घास के मैदान और झाड़ियाँ।

प्राकृतिक वनस्पति के विकास में विभिन्न कारक

1. तापमान – एक पौधे को अपनी वृद्धि के लिए मासिक औसत तापमान कम से कम 6°C की आवश्यकता होती है। इससे कम तापमान पर पौधे नहीं पनप सकते। इसी तरह, उच्च तापमान भी पौधों के मुरझाने का कारण बन सकता है। तापमान में परिवर्तन से वनस्पति के आकार और प्रकार में भी परिवर्तन होता है।

2. वर्षा – यह वनस्पति की वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारक है। विभिन्न पौधों को अलग-अलग मात्रा में वर्षा की आवश्यकता होती है।

3. मिट्टी – मिट्टी के प्रकार और इसकी विभिन्न विशेषताओं का भी वनस्पति पर काफी प्रभाव पड़ता है। भारत में बांगर मिट्टी क्षेत्रों की वनस्पति खादर मिट्टी क्षेत्रों की वनस्पति से भिन्न है। इसी प्रकार रेतीली मिट्टी में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां उत्पन्न होती हैं।

4. सतही प्रकृति – सतही प्रकृति भी वनस्पति को प्रभावित करती है। हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में वर्षा की मात्रा का वनस्पति पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। यहां ऊंचाई और तापमान ने वनस्पति क्षेत्रों को निर्धारित किया है।

5. सूरज की रोशनी – सूरज की रोशनी पौधों की वृद्धि में बेहद अहम भूमिका निभाती है। यह प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।

भारत में प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार

  1. नम उष्णकटिबंधीय सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वनस्पति
  2. उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वनस्पति
  3. उष्णकटिबंधीय शुष्क वनस्पति
  4. ज्वारीय वनस्पति
  5. पर्वतीय वनस्पति

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