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पोषण की परिभाषा क्या है | Poshan Ki Paribhasha Kya Hai

इस आर्टिकल में हम, पोषण की परिभाषा क्या है यह जानेंगे। कुपोषण भारत की गंभीर समस्याओं में से एक है, लेकिन फिर भी इस पर सबसे कम ध्यान दिया गया है। नतीजा यह होता है कि सिर्फ इसी वजह से देश पर बीमारियों का बोझ बहुत ज्यादा होता है। हालांकि, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (एनएफएचएस-4) के आंकड़े बताते हैं कि देश में कुपोषण की दर में कमी आई है। लेकिन आज भी आधे से अधिक बच्चे (51%) अविकसित हैं, और सबसे कम आय वर्ग वाले परिवारों में कम वजन (49%) हैं।

पोषण की परिभाषा क्या है

पोषण की परिभाषा क्या है

पोषण एक ऐसी विधि है जिसमें जीवों द्वारा शरीर में भोजन का सेवन किया जाता है और भोजन से पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है। मैक्रोन्यूट्रिएंट वे पोषक तत्व हैं जिनकी लोगों को अपेक्षाकृत बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज, फाइबर और पानी सभी पोषक तत्व हैं।

आज भारत में कुपोषण की दर आश्चर्यजनक रूप से कम हो गई है। इसके बावजूद हमारा देश दुनिया में अविकसित और कमजोर बच्चों का सबसे बड़ा घर बना हुआ है। राज्यों के बीच बड़ी सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता है। इसके चलते कुपोषण के खिलाफ जंग जीतने के लिए अच्छे पोषण अभियान की जरूरत है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि जीवन के पहले दो वर्षों के दौरान कुपोषण जड़ पकड़ लेता है। उस समय तक मस्तिष्क अपनी कुल क्षमता का लगभग 85 प्रतिशत तक विकसित हो चुका होता है। यदि कुपोषण को सही समय पर नियंत्रित नहीं किया गया तो यह बच्चे के शारीरिक और मस्तिष्क के विकास को इतना नुकसान पहुंचाता है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।

गर्भधारण से लेकर अगले 1000 दिनों तक या बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक का पूरा समय कुपोषण को रोकने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर है। इस दौरान प्राप्त होने वाला पोषण पीढ़ीगत कुपोषण के चक्र को तोड़ने में सहायक होता है। नहीं तो कुपोषित लड़कियां आगे चलकर कुपोषित मां बन जाती हैं जो कमजोर बच्चों को जन्म देती हैं।

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