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फूलन देवी की मृत्यु कैसे हुई

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जन्मी एक लड़की, जो एक कांड के चलते पूरे देश में मशहूर हो गई। एक खतरनाक डकैत, जिसकी जिंदगी पर फिल्म तक बन गई। वह दो बार चुनाव जीती और संसद पहुंचीं। इस लेख में हम फूलन देवी की मृत्यु कैसे हुई जानेंगे।

फूलन देवी (Phoolan Devi) का नाम सुनते ही उनके दिमाग में एक लड़की की तस्वीर कौंध जाती है, जिसने 14 फरवरी 1981 को अपने जुल्म का बदला लेने के लिए कानपुर के बेहमई में लाइन में खड़े 22 ठाकुरों को गोली मार दी थी। फूलन देवी पर 22 हत्याएं, 30 डकैती और अपहरण के 18 मामले थे, जिसके चलते उन्हें 11 साल जेल में बिताने पड़े।

फूलन देवी की मृत्यु कैसे हुई

फूलन देवी की मृत्यु कैसे हुई

फूलन देवी की मृत्यु 25 जुलाई 2001 को गोली लगने के कारण हुई। उस दिन नाग पंचमी थी। फूलन देवी ने उस दिन खीर का हलवा बनाकर सबको खिलाया था। उस दिन वहां कई लोग फूलन से मिलने आए थे और प्रसाद भी लिया था। प्रसाद लेने वालों में शेर सिंह राणा एक युवक था, लेकिन वह शेखर के नाम से फूलन से मिलने आया था। उसने कहा था कि वह फूलन द्वारा बनाई गई एकलव्य सेना में शामिल होना चाहता है। उमा कश्यप एकलव्य सेना की उत्तराखंड इकाई की सदस्य थीं। उस दिन उमा भी वहां मौजूद थीं।

25 जुलाई से कुछ समय पहले फूलन और उसके पति उम्मेद सिंह के बीच काफी झगड़ा हुआ करता था। फूलन और उम्मेद सिंह के तकरार की वजह उम्मेद सिंह के अन्य महिलाओं के साथ संबंध होने का शक था। इन्हीं विवादों के बीच फूलन देवी अपनी वसीयत लिखने की योजना बना रही थी। फूलन ने ऐसे संकेत भी दिए थे कि इस वसीयत में उम्मेद सिंह के नाम पर तमाम तरह की संपत्ति, मकान और रायल्टी आदि के साथ कुछ नहीं किया जा रहा है।

25 जुलाई 2001 को उस बंगले में फूलन के अलावा उनकी बहन मुन्नी, पति उमेद सिंह, उमा कश्यप मौजूद थीं। मुलाकात करने वालों में शेखर उर्फ ​​शेर सिंह राणा भी था, जो संसद में गई फूलन के बंगले में लौटने के इंतजार में गेस्ट रूम में बैठा था। उस दिन किसी ने ध्यान नहीं दिया कि वही लड़का कुछ महीने पहले इस बंगले में आया था। 11 बजे संसद के लिए रवाना हुई फूलन दोपहर करीब 1.30 बजे बंगले पर लौटी तो तीन लोगों ने गोली मारकर फूलन की हत्या कर दी।

फूलन को तीन लोगों ने गोली मारी थी, हत्या के दो दिन बाद शेर सिंह राणा ने देहरादून में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए हत्या की जिम्मेदारी ली। बाद में राणा ने गोली चलाने वाले एक अन्य व्यक्ति का नाम लिया। लेकिन वह तीसरा कौन था? यह सवाल अब भी कायम है। राणा ने कहा था कि उसने 1981 में फूलन द्वारा 22 ठाकुरों की हत्या का बदला लेने के लिए फूलन की हत्या की थी।

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