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पीसी कल्चर क्या होता है? यह किससे संबंधित होता है? जानिये सबकुछ

इस लेख में आप, पीसी कल्चर क्या होता है? यह किससे संबंधित होता है? और यह किस तरह किया जाता है? इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे।

पीसी कल्चर क्या होता है? यह किससे संबंधित होता है? और यह किस तरह किया जाता है?

पीसी कल्चर क्या होता है

पीसी कल्चर (Pisciculture) का अर्थ मत्स्यपालन या मछली पालन होता है। मछली जलीय पर्यावरण पर निर्भर एक जलीय जीव है और जलीय पर्यावरण को संतुलित रखने में इसकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। पीसी कल्चर शब्द मत्स्यपालन से संबंधित है। वैज्ञानिकों ने मछली को बायोइंडिकेटर माना है। विभिन्न जलाशयों में तेज या धीमी गति से बहने वाली नदियाँ हों, प्राकृतिक झीलें हों, तालाब हों या मानव निर्मित बड़े या मध्यम आकार के जलाशय, यदि सभी के पर्यावरण का सूक्ष्म अध्ययन किया जाए तो यह निष्कर्ष निकलता है कि जल और मछली दोनों समान हैं। एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं। पर्यावरण को संतुलित रखने में मछली की विशेष उपयोगिता है।

पीसी कल्चर किसे कहते हैं

पीसी कल्चर मछली पालन को कहते हैं। जिस प्रकार कृषि के लिए भूमि आवश्यक है, उसी प्रकार मत्स्य पालन के लिए तालाब की आवश्यकता होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में विभिन्न आकार के तालाब और तालाब उपलब्ध हैं, जो निजी, संस्थागत या ग्राम परिषदों की संपत्ति हैं। ऐसे जल संसाधन या तो अनुपयोगी पड़े हैं या उनका उपयोग मिट्टी की निकासी, शाहबलूत की खेती, मवेशियों को पानी देने, पास की खेती योग्य भूमि की सिंचाई आदि के लिए किया जाता है।

मत्स्य पालन कैसे करते है

मत्स्य पालन के लिए 0.2 हेक्टेयर से 5.0 हेक्टेयर तक के ऐसे तालाबों का चयन करना चाहिए जिनमें साल भर 8-9 महीने पानी भरा रहता है। तालाबों को सदाबहार रखने के लिए जल आपूर्ति का स्रोत होना चाहिए। तालाब में साल भर एक से दो मीटर पानी जरूर रखना चाहिए। ऐसे क्षेत्रों में तालाबों का चयन किया जाना चाहिए जो बाढ़ से प्रभावित न हों और तालाब तक आसानी से पहुँचा जा सके।

तालाब को उचित आकार और आकार देने के लिए यदि टीले आदि हों तो उनकी मिट्टी को हटाकर बांधों पर लगाना चाहिए। कम गहराई वाले क्षेत्र से मिट्टी हटाकर गहराई को एक समान बनाया जा सकता है। तालाब के बांधों को बाढ़ के स्तर से ऊंचा रखा जाना चाहिए।

पानी के आने और जाने के रास्ते में जाल की व्यवस्था करना आवश्यक है ताकि पाले जाने वाली मछलियाँ बाहर न जा सकें और अवांछित मछलियाँ तालाब में न आ सकें। तालाब का सुधार कार्य अप्रैल व मई माह तक कर लेना चाहिए ताकि मत्स्य पालन के लिए समय दिया जा सके।

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