Menu Close

नुक्कड़ नाटक क्या होता है? इसके लोकप्रिय विषय एवं इतिहास

नुक्कड़ नाटक क्या होता है? नुक्कड़ नाटक का इतिहास तथा नुक्कड़ नाटकों के लोकप्रिय विषय: नाटक के क्षेत्र में नुक्‍कड़ नाटक को एक सांस्कृतिक दर्जा प्राप्त होने मे में समय लगा। शुरू में साहित्‍य और नाटकों के विद्वानों और जानकारों ने नुक्‍कड़ नाटक को शास्त्रीय नाट्य-विधा के रूप में स्‍वीकार करने पर संकोच प्रकट किया।

इसे अभी लोक-नाट्य की श्रेणी में रखा गया लेकिन पिछले तीन दशकों के दौरान नुक्‍कड़ नाटक काफी लोकप्रिय होते चले गए और कई नामचीन नाटककार और रंगकर्मी इससे जुड़ गए। सच तो यह है कि नुक्‍कड़ नाटकों ने पारंपरिक रंगमंचीय नाटकों को भी काफी प्रभावित कर दिया है। इसे अब सहज भाव से लोग स्वीकारने लगे है।

नुक्कड़ नाटक क्या होता है

नुक्कड़ नाटक क्या होता है

नुक्कड़ नाटक परंपरागत रंगमंचीय नाटकों से भिन्‍न ऐसी नाट्य विधा है, जो रंगमंच पर सादर नहीं किया जाता। नुक्कड़ नाटक किसी विशेष लेखक द्वारा लिखित ना होकर सामाजिक विषयों का संदर्भ होता है। जैसा कि नाम से जाहिर है इसे किसी सड़क, गली, चौराहे या किसी संस्‍थान के गेट अथवा किसी भी सार्वजनिक स्‍थल पर खेला जाता है।

इसकी तुलना सड़क के किनारे मजमा लगा कर तमाशा दिखाने वाले मदारी के खेल से भी की जा सकती है। अंतर यह है कि यह मजमा बुद्धिजीवियों द्वारा किसी उद्देश्‍य को सामने रख कर लगाया जाता है। भारत में राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस सफ़दर हाशमी के जन्म दिवस १२ अप्रैल को देशभर में के रूप में मनाया जाता है। आधुनिक नुक्कड़ नाटक को लोकप्रिय बनाने मे उनका श्रेय सबसे ज्यादा माना जाता है।

नुक्कड़ नाटक का इतिहास

नुक्कड़ नाटक का इतिहास

किसी भी नाटक या सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुवात आरंभ मे खुले आसमान के नीचे से ही हुई, इसी क्रम मे नुक्कड़ नाटक का भी नाम आता है। आदिम युग में सब लोग दिन भर काम से थक जाने के बाद मनोरंजन के लिए कही खुले में एक घेरा बनाकर बैठ जाते थे और उस घेरे के बीचों-बीच ही उनका भोजन पकता रहता, खान-पान होता और वही बाद में नाचना-गाना होता।

इस प्रकार शुरू से ही नुक्कड़ नाटकों से जुड़े तीन ज़रूरी तत्वों की उपस्थिति इस प्रक्रिया में भी शामिल थी – प्रदर्शन स्थल के रूप में एक घेरा, दर्शकों और अभिनेताओं का अंतरंग सम्बंध और सीधे-सीधे दर्शकों की रोज़मर्रा की जिंद़गी से जुड़े कथानकों, घटनाओं और नाटकों का मंचन। 

मध्यकाल में सही रूप में नुक्कड़ नाटकों से मिलती-जुलती नाट्य-शैली का जन्म और विकास भारत के विभिन्न प्रांतों, क्षेत्रों और बोलियों-भाषाओं में लोक नाटकों के रूप में हुआ। उसी के समांतर पश्चिम में भी चर्च अथवा धार्मिक नाटकों के रूप में इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन आदि देशों में ऐसे नाटकों का प्रचलन शुरू हुआ जो बाइबिल की घटनाओं पर आधारित होते थे।

आधुनिक युग में जिस रूप में हम नुक्कड़ नाटकों को जानते है, उनका इतिहास भारत के स्वाधीनता संग्राम के दौरान कौमी तरानों, प्रभात फेरियों और विरोध के जुलूसों के रूप में देखा जा सकता है। इसी का एक विधिवत रूप इप्टा जैसी संस्था के जन्म के रूप में सामने आया, जब पूरे भारत में अलग-अलग कला माध्यमों के लोग एक साथ आकर मिले और क्रांतिकारी गीतों, नाटकों व नृत्यों के मंचनों और प्रदर्शनों से विदेशी शासन एवं सत्ता का विरोध आरंभ हुआ।

नुक्कड़ नाटकों के लोकप्रिय विषय

नुक्कड़ नाटक का इतिहास

राजनीतिक, सामाजिक या सास्कृतिक विषयों से जुड़ी समस्याएँ जिनका सीधा नाता जन सामान्य से हो, ऐसे विषय नुक्कड़ नाटकों के मंच से उठाए जाते है। इन विषयों से जुड़ी समस्याएँ और इनपर चिंता एवं उनका निराकरण नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से प्रकट किया जाता है। धार्मिक व्यवस्था से निर्माण हुई कुछ कुप्रथावों का भी बखान इन नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से किया जाता है।

गलत व्यवस्था का विरोध और उसके समांतर एक आदर्श व्यवस्था क्या हो सकती है – यही वह संरचना है, जिस पर नुक्कड़ नाटक की धुरी टिकी हुई है। कभी वह किस्से-कहानियों का प्रचार था, कभी धर्म और कभी राजनैतिक विचारधारा। किसी भी युग और काल में इस तथ्य को रेखांकित कर सकते हैं।

आज बड़ी-बड़ी व्यावसायिक-व्यापरिक कंपनियां अपने उत्पादनों के प्रचार के लिए नुक्कड़ नाटकों का प्रयोग कर रही हैं, सरकारी तंत्र अपनी नीतियों-निर्देशों के प्रचार के लिए नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यम का सहारा लेता है और राजनीतिक दल चुनाव के दिनों में अपने दल के प्रचार-प्रसार के लिए इस विधा की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे में नुक्कड़ नाटकों के बहुविध रूप और रंग के कारण इसकी स्वीकार्यता बढ़ी है।

नुक्कड़ नाटक क्या है? नुक्कड़ नाटक का इतिहास तथा नुक्कड़ नाटकों के लोकप्रिय विषय: हम उम्मीद करते है यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। बाकी ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए आर्टिकल देख सकते हो।

यह भी पढे:

Related Posts