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नीले रंग की नील से सफेद कपड़ों में दाग क्यों नहीं लगता

सभी सफेद वस्त्र धारण करते हैं। और हर कोई नील का इस्तेमाल उन्हें चमकदार बनाने के लिए भी करता है। हम सभी यह भी जानते हैं कि सफेद कपड़े पर किसी भी तरह का रंग उस पर दाग बना देता है। सवाल यह है कि नीले रंग की नील से सफेद कपड़ों में दाग क्यों नहीं लगता, चमक कैसे आ जाती है? आइए जानते है।

नीले रंग की नील से सफेद कपड़ों में दाग क्यों नहीं लगता, चमक कैसे आ जाती है

नीले रंग की नील से सफेद कपड़ों में दाग क्यों नहीं लगता, चमक कैसे आ जाती है

दरअसल जिसे हम नील कहते हैं और सफेद कपड़ों में चमक लाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। उस गंदगी को साफ करने के लिए कोई डिटर्जेंट लिक्विड या शैम्पू नहीं है, बल्कि एक केमिकल है। इसमें ब्लीचिंग पाउडर होता है। यह नीला रंग नहीं है, लेकिन रसायनों के मिश्रण के कारण इस तरल का रंग नीला हो जाता है। सफेद कपड़े पर किसी प्रकार की कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं होती है, इसलिए इस तरल के साथ पानी का प्रयोग किया जाता है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि ब्लीचिंग पाउडर कपड़ों को सैनिटाइज करने का काम करता है। ब्लीचिंग पाउडर एक ऐसा रसायन है जो कपड़े को प्राकृतिक रूप से सफेद करता है। यह एंटीफंगल के साथ-साथ एंटीसेप्टिक भी है। शायद यही कारण है कि स्कूल में और अधिकांश महान व्यवसायों में वर्दी शर्ट सफेद होती है।

ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक नाम कैल्शियम हाइपोक्लोराइट है और रासायनिक सूत्र Ca(OCl)2 है। जो एक एंटी कलरिंग एजेंट है जो किसी भी तरह के रंग यानी डिसकोलाइजर को उड़ा देता है। जबकि नील एक ऐसे पौधे से प्राप्त होता है जिसका वानस्पतिक नाम इंडिगोफेरा टिनक्टोरिया है, लेकिन आजकल प्राकृतिक के बजाय कृत्रिम नील का उपयोग किया जाता है। भारत में भी नील का ऐतिहासिक महत्व है। भारत में नील की खेती को लेकर एक “शून्य क्रांति” भी हुई थी।

आशा है की यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। ऐसे ही मजेदार जानकारी के लिए जरा हटके के बाकी पोस्ट पढ़े।

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