Menu Close

मूलांकुर से क्या बनता है

वनस्पति विज्ञान में मूलांकुर (Radicle) अंकुरण की प्रक्रिया के दौरान बीज से निकलने वाला अंकुर का पहला भाग होता है। मूलांकुर पौधे की भ्रूणीय जड़ है, और मिट्टी में नीचे की ओर बढ़ता है। मूलांकुर के ऊपर भ्रूणीय तना या हाइपोकोटिल होता है, जो बीजपत्रों को सहारा देता है। इस लेख में हम मूलांकुर से क्या बनता है जानेंगे।

मूलांकुर से क्या बनता है

मूलांकुर से क्या बनता है

मूलक बीज में विकसित होकर प्राथमिक जड़ बनाता है। मूलांकुर से मूसला जड़ बनता है। बीज में मूलांकुर वृद्धि करके प्राथमिक मूल बनाता है। प्राथमिक मूल से द्वितीयक व तृतीयक मूल निकलती है। प्राथमिक मूल व शाखाएं मिलकर मूसला मूल तंत्र बनाती है। यह बीज के अंदर भ्रूणीय जड़ है। यह पहली चीज है जो बीज से और नीचे जमीन में उतरती है ताकि बीज पानी को सोख सके और अपनी पत्तियों को बाहर भेज सके ताकि वह प्रकाश संश्लेषण शुरू कर सके।

मूलांकुर एक बीज से माइक्रोपाइल के माध्यम से निकलता है। पौध में मूलांकुर को दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। बीज कोट के निशान (Seed coat scar) या हिलम (Hilum) से दूर की ओर इशारा करने वालों को एंटीट्रोपस के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, और जो हिलम की ओर इशारा करते हैं वे सिंट्रोपस होते हैं। यदि मूलांकुर सड़ना शुरू हो जाता है, तो अंकुर पूर्व-उद्भव से भीग जाता है। यह रोग मूलांकुर पर काले धब्बे के रूप में प्रकट होता है। अंत में, यह अंकुर की मृत्यु का कारण बनता है।

यह भी पढे –

Related Posts

error: Content is protected !!