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लोहे में जंग क्यों लगता है? जानिये कारण

आपने अक्सर सुना होगा कि काम करना चाहिए नहीं तो जैसे लोहे में जंग लग जाता है, वैसे ही हमारे शरीर में भी जंग लग जाएगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लोहे में जंग क्यों और कैसे लगती है? घर में मौजूद लोहे के सामान में जंग लगना आम बात है। बहरहाल, इसकी शुरुआत कैसे होती है और इसे कैसे रोका जा सकता है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं। इस लेख में हम, लोहे में जंग क्यों लगता है और जंग लगने का क्या कारण है यह जानेंगे। साथ में लोहे में जंग लगने की क्रिया और जंग लगने से उसका भार पर क्या प्रभाव पड़ता है इसे भी यहा जानेंगे।

लोहे में जंग क्यों लगता है? जानिये कारण

लोहे में जंग क्यों लगता है

दरसल ज्यादातर पानी के नमी के संपर्क के कारण लोहे में जंग लगता है। सवाल यह है कि लोहे में जंग क्यों लगती है और पानी में क्या होता है, जिससे लोहे में तेजी से जंग लगती है और लोहा खत्म हो जाता है। ज्यादातर लोग ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन अगर आपको याद हो तो लोहे की नई वस्तु चमकदार होती है, लेकिन नमी एक जगह रखी जाने के कारण धीरे-धीरे उस पर जंग नामक लाल परत बन जाती है। इस प्रक्रिया को जंग लगना कहते हैं। पहले रंग बदलता है और फिर जंग लगने लगता है।

लोहे पर जंग लगने का क्या कारण है

लोहे में जंग लगने का मुख्य कारण ऑक्सीजन और नमी है। लोहे को एक मजबूत धातु माना जाता है लेकिन जब यह जंग लग जाता है तो इसका कोई फायदा नहीं होता है। बचपन में हम इसे विज्ञान की किताबों में जंग पढ़ा करते थे। यानी जब लोहा ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आता है तो लोहा उनके साथ प्रतिक्रिया करके कुछ अवांछित यौगिक बनाता है और लोहा खराब होने लगता है और इससे उसका रंग भी बदल जाता है, इसे लोहे में जंग लगना कहते हैं।

लोहे में जंग लगने की क्रिया

लोहे में जंग लगने की क्रिया संक्षारण (Corrosion) होती है। संक्षारण का अर्थ है धीरे-धीरे विलुप्त होना। जंग तब होती है जब कोई धातु नमी के संपर्क में आती है। लोहे का संक्षारण एक गंभीर समस्या है। न केवल लोहा, बल्कि चांदी पर भी काली कोटिंग होती है, जबकि तांबे पर हरे रंग की कोटिंग को जंग भी कहा जाता है। जंग को रोकने के लिए लोहे या अन्य धातुओं को नमी से सुरक्षित रखना चाहिए। यह लोहे के जीवन को बहुत बढ़ाता है।

लोहे पर जंग लगने से उसका भार

जंग लगने पर लोहे का भार बढ़ जाता है। क्योंकि लोहे में जंग तब लगती है जब लोहा ऑक्सीजन के साथ रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया करता है और नमी की उपस्थिति में लोहे के ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रतिक्रिया के दौरान, लोहे में ऑक्सीजन की मात्रा भी जुड़ जाती है, इसलिए लोहे का वजन बढ़ जाता है। इस दौरान आयरन का वजन उतना ही बढ़ जाता है, जितनी ऑक्सीजन लेता है।

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