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लक्ष्य भाषा किसे कहते हैं

लक्ष्य का अर्थ है ‘उद्देश्य’, यानी वह बात, जानकारी या चीज़ जिसे हासिल करना उद्देश्य हो। या हम यह भी कह सकते हैं कि जिस कार्य या वस्तु की सिद्धि हमारे लिए अभिप्रेत है और उसकी पूर्ति के लिए, उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इस प्रकार, ‘लक्ष्य-भाषा’ का अर्थ उस भाषा से होगा जिसमें सूचना प्राप्त करने का उद्देश्य है। इस लेख में हम, लक्ष्य भाषा किसे कहते हैं जानेंगे।

लक्ष्य भाषा किसे कहते हैं

लक्ष्य भाषा किसे कहते हैं

एक भाषा में दिए गए ज्ञान का दूसरी सरल भाषा में अनुवाद किया जाता है ताकि इसे समझना आसान हो या उस जानकारी को जन-जन तक पहुँचाया जा सके। वह भाषा जिसमें ज्ञान या सूचना का अनुवाद किया जाता है, उसे लक्ष्य भाषा कहते हैं। उदाहरण – जब हिंदी, अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जाता है या जन-जन तक पहुँचाया जाता है, तो जिन भाषाओं में अनुवाद हुआ है, वे सभी ‘लक्ष्य-भाषाएँ’ होंगी।

अनुवाद के क्षेत्र में लक्ष्य भाषा और स्रोत भाषा दोनों शब्दों का प्रयोग अक्सर किया जाता है। अनुवाद का अर्थ है एक भाषा में लिखे गए किसी कार्य को दूसरी भाषा में स्थानांतरित करना। स्रोत भाषा वह भाषा है जिसमें मूल कार्य लिखा गया था। लक्ष्य भाषा वह है जिसमें काम का अनुवाद किया जाता है। उदाहरण के लिए – संस्कृत भाषा में लिखी गई ‘रामायण’ का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया गया है। यहाँ रामायण की पहली भाषा संस्कृत ‘स्रोत भाषा’ है और बाद की भाषा अंग्रेजी ‘लक्ष्य भाषा’ है।

लक्ष्य भाषा की आवश्यकता का प्रयोग अधिकतर अनुवाद के सन्दर्भ में किया जाता है। जब एक भाषा को अपने स्वयं के कथन को दूसरी भाषा में प्रयोग करना होता है, अर्थात एक भाषा के कथन को दूसरी भाषा के कथन में परिवर्तित करना होता है, तो उसे अनुवाद कहा जाता है। अतः अनुवाद के माध्यम से एक भाषा में कही गई बात को दूसरी भाषा में इस प्रकार कहना है कि पहली भाषा का अर्थ पूरी तरह से स्पष्ट हो सके।

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