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कानून के शासन का क्या अर्थ होता है

भारत का संविधान कहता है कि प्रत्येक नागरिक के लिए एक कानून होगा जो समान रूप से लागू होगा। जन्म, जाति आदि के कारण किसी को विशेषाधिकार नहीं मिलेगा। किसी राज्य में कानून का शासन अस्तित्व में नहीं कहा जा सकता है यदि एक वर्ग विशेषाधिकार प्राप्त है और अन्य इससे वंचित हैं। इस लेख में हम, कानून के शासन का क्या अर्थ होता है इसे जानेंगे।

कानून के शासन का क्या अर्थ होता है

कानून के शासन का क्या अर्थ होता है

कानून के शासन का अर्थ एक कानूनी सिद्धांत है जो बताता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं होता है और सरकारी निर्णय केवल ज्ञात कानूनी और नैतिक सिद्धांतों को लागू करके ही किए जाने चाहिए। कानून का शासन कानूनों और संविधान की न्यायिक रक्षा द्वारा सरकार की शक्तियों को सीमित करता है जो अंतरराष्ट्रीय कानून में स्थापित मान्यता प्राप्त बुनियादी कानूनी मूल्यों पर आधारित है। कानून का शासन तानाशाही को रोकने और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।

भारतीय संविधान ने न केवल देश के नागरिकों को, बल्कि विदेशियों को भी समान रूप से बिना किसी जाति, धर्म, जाति, जन्म स्थान आदि के भेदभाव के कानून के संरक्षण की समानता प्रदान की है। पुरुषों और महिलाओं के अधिकारों के बीच कोई अंतर नहीं है। सभी नागरिकों को नोकरी या सरकारी रोजगार में समान अवसर का अधिकार मिला है। अनुच्छेद १७ अनुसार, अस्पृश्यता पालना कानूनन दंडनीय अपराध है।

अनुच्छेद 20 के अनुसार, कानून द्वारा निर्धारित अपराध के लिए एक नागरिक को केवल एक बार दंडित किया जा सकता है। अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को केवल कानून द्वारा ही मृत्युदंड या कारावास दिया जा सकता है। केवल आपात स्थिति की असाधारण परिस्थितियों में ही सरकार मामले पर मुकदमा चलाए बिना किसी को नजरबंद कर सकती है।

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