Menu Close

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल के द्वितीय युग का नाम क्या है? जानिये

हिंदी भारत और दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। इसकी जड़ें प्राचीन भारत की संस्कृत भाषा में जाती हैं, लेकिन मध्यकालीन भारत की अवधी, मगधी, अर्धमागधी और मारवाड़ी जैसी भाषाओं का साहित्य हिंदी का प्रारंभिक साहित्य माना जाता है। हिंदी साहित्य ने अपनी शुरुआत देशी काव्य के माध्यम से की और गद्य का विकास बहुत बाद में हुआ। हिन्दी का सबसे प्राचीन साहित्य अपभ्रंश में मिलता है। इस लेख में आप, हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का आरंभ किस युग से माना जाता है? इस के प्रथम और द्वितीय युग का नाम क्या है इसे जानेंगे।

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का आरंभ किस युग से माना जाता है? इस के प्रथम और द्वितीय युग का नाम क्या है

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का आरंभ किस युग से माना जाता है

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का आरंभ भारतेन्दु हरिश्चंद्र युग से माना जाता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र का 1850 से 1900 ई. तक की कविताओं पर गहरा प्रभाव था। वे आधुनिक हिन्दी साहित्य के जनक हैं। उन्होंने भाषा को गतिशील रूप देने का प्रयास किया। उनकी कविता में पुराने और नए के संयोजन को लक्षित किया गया है। उनकी कविता में भक्तिपूर्ण, कर्मकांडी परंपराएं देखी जा सकती हैं, जबकि आपकी कविताओं में आधुनिक नए विचार और भाव भी मिलते हैं।

भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने भक्ति-प्रधान, श्रृंगार-प्रधान, देश-प्रेम-प्रधान और सामाजिक-समस्या प्रधान कविताओं की रचना की है। उन्होंने हिन्दी कविता को ब्रजभाषा से खारीबोली तक ले जाने का प्रयास किया। आपके युग में और भी कई महान हस्तियां हैं जिन्होंने विभिन्न तरीकों से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल के प्रथम युग का नाम क्या है

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल के प्रथम युग का नाम भारतेन्दु हरिश्चंद्र काल है, जो 1950 के बाद का माना जाता है। जैसे की हमने ऊपर उल्लेख किया है।

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल के द्वितीय युग का नाम क्या है

हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल के द्वितीय युग का नाम द्विवेदी युग है, जो महावीर प्रसाद द्विवेदी के हिन्दी साहित्य के योगदान प्रति रखा गया है। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का जन्म 15 मई 1864 को हुआ था और उनका निधन 21 दिसंबर 1938 को हुआ था। वे एक महान साहित्यकार, पत्रकार और हिंदी के युग-निर्माता थे। उन्होंने हिंदी साहित्य की अविस्मरणीय सेवा की और अपने युग की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को दिशा और दृष्टि प्रदान की।

महावीर प्रसाद द्विवेदी के अतुलनीय योगदान के कारण, आधुनिक हिंदी साहित्य के दूसरे युग को ‘द्विवेदी युग’ (1900-1920) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने सत्रह वर्षों तक प्रसिद्ध हिंदी पत्रिका सरस्वती का संपादन किया। उन्होंने हिंदी पुनर्जागरण में एक महान भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को गति और दिशा देने में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

Related Posts

error: Content is protected !!