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हलाल और झटका मीट क्या है

हलाल एक अरबी शब्द है और इसे इस्लामी कानून के अनुसार परिभाषित किया गया है। इस्लाम में केवल हलाल मांस की प्रक्रिया का पालन करने की अनुमति है। वैसे भी मुसलमान हलाल मीट ही खाते हैं, जबकि सिख और हिंदू झटका मीट को तरजीह देते हैं। कुछ ना कुछ कारणों से हलाल और झटका मीट सुर्खियों में रहते है, अगर आप नहीं जानते की हलाल और झटका मीट क्या है (Halal aur Jhatka Meat Kya Hai) तो हम इस आर्टिकल में सभी सवालों का जवाब देने जा रहे है।

हलाल और झटका मीट क्या है - Halal aur Jhatka Meat Kya Hai

हलाल मीट क्या है

हलाल करने से पहले कलमा का पाठ करने और गर्दन पर तीन बार वार करने की मान्यता है। इस्लामिक कानून के मुताबिक हलाल के दौरान जानवर बेहोश नहीं होना चाहिए। हलाल मीट के लिए जानवर की गर्दन को धारदार चाकू से काटा जाता है। सांस की नस कटने के कुछ देर बाद ही जानवर की जान चली जाती है।

मुस्लिम मान्यता के अनुसार हलाल वाले जानवर के सामने दूसरा जानवर नहीं लेना चाहिए। एक जानवर के हलाल होने के बाद ही दूसरे को वहां ले जाना चाहिए। हलाल करने वाले लोगों का कहना है कि धारदार चाकू से सांस की नली को काटने से चंद सेकेंड में ही जान चली जाती है।

झटका मीट क्या है

झटका का नाम बिजली के झटके से आता है। इसमें जानवर को काटने से पहले उसके दिमाग को बिजली का झटका देकर सुन्न कर दिया जाता है ताकि उसे ज्यादा संघर्ष न करना पड़े। उसी अचेत अवस्था में धारदार हथियार से प्रहार कर सिर धड़ से अलग कर दिया जाता है। झटका के पक्ष में रहने वालों का कहना है कि इस तरीके से जानवर को सांस लेने का भी मौका नहीं मिलता। गर्दन कब कट जाती है और उन्हे पता भी नहीं चलता।

हलाल और झटका मीट दोनों में जानवर मारा जाता है, उसे मारने का तरीका ही अलग होता है। झटके के मांस में जानवर की गर्दन पर धारदार हथियार से प्रहार किया जाता है जिससे वह एक झटके में अपनी जान गंवा देता है। वहीं हलाल मीट के लिए जानवर की गर्दन और सांस की नस काट दी जाती है, जिसके कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो जाती है। झटका देने का तरीका अपनाने वालों का कहना है कि इसमें जानवरों को दर्द नहीं सहना पड़ता क्योंकि एक झटके में उनकी जान चली जाती है।

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