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गुरु गोरखनाथ की मृत्यु कैसे हुई

गुरु गोरखनाथ (Gorakhnath) एक हिंदू योगी, संत थे जो भारत में नाथ हिंदू मठ आंदोलन के प्रभावशाली संस्थापक थे। उन्हें मत्स्येंद्रनाथ के दो उल्लेखनीय शिष्यों में से एक माना जाता है। उनके अनुयायी भारत में गर्भगिरि नामक स्थान पर पाए जाते हैं, जो महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर में है। इन अनुयायियों को योगी, गोरखनाथी, दर्शनी या कनफटा कहा जाता है। वह नौ संतों में से एक थे जिन्हें नवनाथ के नाम से भी जाना जाता है और महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश राज्य में व्यापक रूप से वे लोकप्रिय हैं। इस लेख में हम, गुरु गोरखनाथ की मृत्यु कैसे हुई जानेंगे।

गुरु गोरखनाथ की मृत्यु कैसे हुई

गुरु गोरखनाथ जी ने पूरे भारत का भ्रमण किया और अनेक ग्रंथों की रचना की। गोरखनाथ जी का मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित है। गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा। गोरखनाथ के शिष्य का नाम भैरोनाथ था, जिसे माता वैष्णोदेवी ने बचाया था। पुराणों के अनुसार वह भगवान शिव के अवतार थे।

गुरु गोरखनाथ की मृत्यु कैसे हुई

गुरु गोरखनाथ मृत्यु एक समाधि के रूप में हुई है, जिसे आमतौर पर लोग मृत्यु के बजाय केवल समाधि कहना पसंद करते है। समाधि वह विधि है जिसमें जीवित व्यक्ति अपने मर्जी से योग या समाधि अवस्था में अपने प्राण का त्याग देते हैं। इतिहासकार उनके जन्म और मृत्यु के समय पर एकमत नहीं है, क्योंकि ऐसे कोई ठोस साक्ष्य या प्रमाण नहीं मिले है जिससे उनके जन्म या मृत्यु की सटीक तारीख की पुष्टि होती हो। फिर भी 11वीं से लेकर 14वीं सदी तक उनके वास्तव को माना जाता है।

हिंदू परंपरा में गुरु गोरखनाथ को महायोगी माना जाता है। उन्होंने एक विशिष्ट आध्यात्मिक सिद्धांत या एक विशेष सत्य पर जोर नहीं दिया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि सत्य और आध्यात्मिक जीवन की खोज मनुष्य का एक मूल्यवान और सामान्य लक्ष्य है।

गोरखनाथ ने समाधि और अपने स्वयं के आध्यात्मिक सत्य तक पहुँचने के साधन के रूप में योग, आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मनिर्णय के नैतिक जीवन का समर्थन किया। गोरखनाथ, उनके विचार और योगी ग्रामीण भारत में अत्यधिक लोकप्रिय रहे हैं, उनके समर्पित मठ और मंदिर भारत के कई राज्यों में पाए जाते हैं, विशेष रूप से इसी नाम का शहर उत्तर प्रदेश का गोरखपुर है, जहां के योगी, योगी आदित्यनाथ है।

नाथ संप्रदाय

नाथ परंपरा कहती है कि इसकी परंपराएं गोरखनाथ से पहले मौजूद थीं, लेकिन आंदोलन का सबसे बड़ा विस्तार गोरखनाथ के मार्गदर्शन और प्रेरणा में हुआ। उन्होंने कई रचनाएँ कीं और आज भी उन्हें नाथों में सबसे महान माना जाता है। यह कहा जाता है कि गोरखनाथ ने लय योग पर पहली किताबें लिखी थीं।

भारत में कई गुफाएं हैं, कई उन पर बने मंदिरों के साथ, जहां कहा जाता है कि गोरखनाथ ने ध्यान में समय बिताया। भगवान नित्यानंद के अनुसार, गोरखनाथ का समाधि मंदिर, गणेशपुरी, महाराष्ट्र, भारत से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर वज्रेश्वरी मंदिर के पास नाथ मंदिर में है।

किंवदंतियों के अनुसार गोरखनाथ और मत्स्येंद्रनाथ ने कर्नाटक के मैंगलोर में कादरी मंदिर में तपस्या की थी। कादरी और धर्मस्थल में शिवलिंग स्थापित करने में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। गोरखनाथ का मंदिर भी वंबोरी, तालुका राहुरी, जिला अहमदनगर के पास गर्भगिरी नामक पहाड़ी पर स्थित है। ओडिशा राज्य में गोरखनाथ का एक प्रसिद्ध मंदिर भी है।

गोरखनाथ मठ

गोरखनाथ मठ नाथ संप्रदाय के मध्यकालीन संत, गोरखनाथ के नाम पर नाथ मठवासी समूह का एक मठ है। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के मठ और शहर का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है। मठ और मंदिर विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियाँ करते हैं और शहर के सांस्कृतिक केंद्र के रूप में काम करते हैं। मठ गोरखनाथ के दर्शन पर ग्रंथ भी प्रकाशित करता है।

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