Menu Close

फरलो क्या होता है

एक कैदी को एक निर्दिष्ट अवधि के लिए जेल में रहने के बाद फरलो (Furlough) दी जा सकती है, जबकि एक विशिष्ट आवश्यकता के लिए पैरोल दी जा सकती है। कुछ प्रकार के कैदियों को छुट्टी से वंचित किया जा सकता है और इसे प्रदान करते समय जनहित पर विचार किया जाता है। इस लेख में हम फरलो क्या होता है जानेंगे।

फरलो क्या होता है

फरलो क्या है

फरलो (Furlough) एक तरह की छुट्टी है, जिसमें कैदी को कुछ दिनों के लिए रिहा किया जाता है। फरलो की अवधि को कैदी की सजा और उसके अधिकार से छूट के रूप में देखा जाता है। फरलो केवल उन्हीं के लिए उपलब्ध है जिन्हें लंबे समय तक दंडित किया गया है। जैसे – आजीवन कारावास। ऐसे में फरलो को कैदी के अधिकार के तौर पर देखा जाता है। यह बिना किसी कारण के समय-समय पर दिया जा सकता है।

चूंकि, जेल हमारे देश के संविधान में राज्य का विषय है। इसलिए हर राज्य में फरलो को लेकर अलग-अलग कानून हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में फरलो का प्रावधान नहीं है। यानी यूपी की किसी भी जेल में सजा पाए शख्स को फरलो नहीं मिल सकता। वहीं, कई राज्यों में साल में 3 बार भी फरलो मिल सकती है।

फरलो और पैरोल के बीच अंतर

1. फरलो और पैरोल दोनों अलग-अलग चीजें हैं। इन दोनों का उल्लेख जेल अधिनियम 1894 में किया गया है। फरलो केवल दोषी कैदी के लिए उपलब्ध है। जबकि पैरोल पर चल रहे किसी भी कैदी को कुछ दिनों के लिए रिहा किया जा सकता है।

2. इसके अलावा फरलो देने के लिए किसी कारण की आवश्यकता नहीं है। लेकिन पैरोल के लिए कोई कारण होना चाहिए। पैरोल तभी मिलती है जब कैदी के परिवार में किसी की मौत हो जाती है, किसी की शादी खून के रिश्ते में हो जाती है या कोई और अहम वजह।

3. एक कैदी को पैरोल से भी वंचित किया जा सकता है। पैरोल अधिकारी यह कहकर मना कर सकता है कि कैदी को रिहा करना समाज के हित में नहीं है।

यह भी पढे –

Related Posts

error: Content is protected !!