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डोकलाम प्रकरण क्या है ? जानें क्या है असल विवाद

डोकलाम एक ऐसा पठार है जिसे भूटान और चीन दोनों ही अपना क्षेत्र मानते हैं। डोकलाम भूटान की हा घाटी, भारत के पूर्वी सिक्किम जिले और चीन के यदोंग काउंटी के मध्य में है। हमने जून 2017 से इस क्षेत्र के विवाद के बारें में कई न्यूज चैनल्स में देखा है। इस लेख में हम, डोकलाम प्रकरण क्या है इसे विस्तार से जानेंगे।

डोकलाम प्रकरण क्या है

डोकलाम प्रकरण में एक सड़क के निर्माण को लेकर भारतीय सशस्त्र बलों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच चल रहे सैन्य सीमा गतिरोध को संदर्भित करता है। गतिरोध 16 जून, 2017 को शुरू हुआ, जब लगभग 270 से 300 भारतीय सैनिकों ने पीएलए को डोकलाम में सड़क बनाने से रोकने के लिए दो बुलडोजर के साथ भारत-चीन सीमा पार की थी।

9 अगस्त 2017 को, चीन ने दावा किया कि केवल 53 भारतीय सैनिक और एक बुलडोजर अभी भी डोकलाम में है। जबकि भारत ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि उसके पास अभी भी करीब 300-350 सैनिक मौजूद हैं। 28 अगस्त 2017 को सितंबर में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले, दोनों देशों ने अपनी सेना वापस लेने का फैसला किया। समस्या के समाधान के कुछ सप्ताह बाद चीन ने 500 सैनिकों के साथ सड़क निर्माण फिर से शुरू कर दिया था।

डोकलाम प्रकरण का मुख्य कारण इसकी लोकेशन है। यह एक त्रि-जंक्शन है, जहां भारत, चीन और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। वैसे इस क्षेत्र पर भारत का कोई दावा नहीं है। दरअसल इस इलाके को लेकर चीन और भूटान के बीच विवाद है। यह वर्तमान में चीन के कब्जे में है और भूटान द्वारा दावा किया जाता है।

डोकलाम प्रकरण क्या है
Image Source: BBC

1949 से भूटान और भारत के बीच आपसी विश्वास और स्थायी दोस्ती का घनिष्ठ संबंध है। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग पर एक समझौता है। 2007 में भारत और भूटान द्वारा हस्ताक्षरित मैत्री संधि के अनुच्छेद 2 में कहा गया है: “भूटान और भारत के बीच मित्रता और सहयोग के घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए, भूटान साम्राज्य की सरकार और भारत गणराज्य की सरकार अपने राष्ट्रीय हितों से संबंधित मुद्दों पर एक दूसरे के साथ निकटता से सहयोग करें।”

1988 से चीन भूटान के कुछ भूभाग पर अतिक्रमण कर रहा है। लेकिन डोकलाम में अभी तक पीएलए की कोई स्थायी मौजूदगी नहीं थी। चीन पहली बार डोकोलाम से जुमली में भूटान आर्मी कैंप तक समतल सड़क बना रहा था। चूंकि यह यह काम पहले से शुरू था और भूटान इसका विरोध नहीं कर पा रहा था। और यह भी स्पष्ट है कि भूटानी पीएलए सैनिकों के लिए निर्माण को रोकने की स्थिति में नहीं हैं, भले ही उन्होंने कई बार जमीन पर और राजनयिक चैनलों के माध्यम से चीनी पक्ष का विरोध किया है, कि भूटानी क्षेत्र के अंदर सड़क का निर्माण पहले ही समझौतों का उल्लंघन है।

इस क्षेत्र का विषय भारत के लिए सीधी चिंता का विषय बन गए हैं। वायर की रिपोर्ट अनुसार कहा गया की, चीन एकतरफा ट्राई-जंक्शन प्वाइंट बदल रहा है। भारत इसे 2012 के आपसी समझौते का उल्लंघन मानता है। जैसा कि विदेश मंत्रालय के बयान में उल्लेख किया गया है कि चीन द्वारा सड़क के निर्माण से क्षेत्र में मौजूदा स्थिति में काफी बदलाव आएगा, यह भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक चीन को भारत पर एक बड़ा सैन्य लाभ देगा। इससे पूर्वोत्तर के राज्यों को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद के अंतर्गत आ जाएगा।

जहां चीन मानता है कि इस क्षेत्र पर उसका अधिकार है, और यह सड़क उसके तिब्बत-सिल्क रोड का हिस्सा है, वहां भारत को तुरंत पीछे हटना होगा। वही भारत और भूटान चाहते हैं कि जब तक इस विवादित क्षेत्र पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक सड़क निर्माण का काम रोक दिया जाए और भविष्य में वहां कोई निर्माण न हो।

इस लेख में हमने, डोकलाम प्रकरण क्या है को जाना। इस तरह के और बाकी ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए लेख पढे:

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