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ध्यानात्मक आसन के प्रकार

पतंजलि ने शांत और आराम से बैठने की क्रिया को आसन कहा है। योग अभ्यास की तैयारी में आसनों का महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि ऐसी शारीरिक स्थितियाँ हैं जिनसे व्यक्ति अपने मन को विकसित कर सकता है। आसन का प्रभाव हमारी अंतःस्रावी ग्रंथियों पर पड़ता है, जिससे उनके कार्यों में सुधार होता है। इस लेख में हम ध्यानात्मक आसन के प्रकार क्या है जानेंगे।

ध्यानात्मक आसन के प्रकार

ध्यानात्मक आसन के प्रकार

1. पद्मासन

शांति या सुख का अनुभव करना या अनुभव करना अलौकिक ज्ञान प्राप्त करने जैसा है, यह तभी संभव है जब आप पूरी तरह से स्वस्थ हों। अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने के कई तरीके हैं, सबसे आसान तरीकों में से एक है योग और प्राणायाम करना।

2. सिद्धासन

जैसा कि नाम से पता चलता है, यह आसन सभी सिद्धियों को प्रदान करता है, इसलिए इसे सिद्धासन कहा जाता है। यमों में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ है, नियमों में शौच श्रेष्ठ है और आसनों में सिद्धासन श्रेष्ठ है।

3. वज्रासन

वज्रासन एक ऐसा आसन है, जिसे खाना खाने के बाद भी किया जा सकता है। इसका अभ्यास पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। जठरशोथ प्रदीप्त होता है, उदर वायु विकार दूर होते हैं। रीढ़ की हड्डी और कंधे सीधे होते हैं और शरीर में रक्त संचार ठीक से होता है। इससे पैरों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं। साथ ही गैस और कब्ज की समस्या भी नहीं होती है।

4. भद्रासन

भद्रासन एक ध्यान मुद्रा है। इसका रोजाना अभ्यास करने से एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है। भद्रासन करने के लिए वज्रासन का अभ्यास होना बहुत जरूरी है। भद्रासन करने से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

5. मुक्तासन

मुक्तासन एक ध्यान वर्गीय आसन है। मुक्तासन का अभ्यास बहुत ही सरल है। साधारण लोग भी इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं। मुक्तासन का दूसरा नाम सुखासन है। इस आसन में साधक लंबे समय तक आराम से बैठ सकता है, इसलिए इसे सुखासन भी कहा जाता है।

6. स्वास्तिकासन

स्वास्तिक का अर्थ है शुभ। यह ध्यान के लिए एक बेहतरीन आसन है। यह आपको कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचाता है। यह शरीर और दिमाग को संतुलित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

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