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दास प्रथा किसे कहते हैं | Das Pratha Kise Kahate Hain

इस लेख में हम, दास प्रथा किसे कहते हैं यह जानेंगे। 1807 में, ब्रिटेन ने गुलामी उन्मूलन अधिनियम के तहत अपने देश में अफ्रीकी दासों के व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। 1808 में, अमेरिकी कांग्रेस ने दासों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। वर्ष 1833 तक यह कानून पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में लागू कर दिया गया था। 1843 में भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान इस प्रथा को रोकने के लिए एक अधिनियम पारित किया गया था।

दास प्रथा किसे कहते हैं | Das Pratha Kise Kahate Hain

गुलामी जैसी अमानवीय प्रथा पूरी दुनिया में जारी है और इंसानों को जानवरों की तरह खरीदा और बेचा जाता है। इन दासों से कारखानों और बागानों में काम कराया जाता है। इसके अलावा गुलामों को जबरन देह व्यापार में धकेला जाता है। दासों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

दास प्रथा किसे कहते हैं

दास प्रथा किसी व्यक्ति को बिना किसी पैसे का भुगतान किये बिना उसे नौकर बनना होता है। दास प्रथा के लिए आसान शब्द गुलाम का इस्तेमाल किया जाता है जो किसी मासिक वेतन के बिना अपने मालिक की सेवा करता है। जो लोग अक्सर कर्ज में डूबे रहते थे या युद्धों में कैद होते थे, उन्हें दास व्यवस्था के माध्यम से गुलाम बना दिया जाता था। फिर भी, प्राचीन भारत में गुलामी न तो यूरोप की तरह व्यापक थी और न ही दासों के साथ ऐसा क्रूर व्यवहार था। दास प्रथा कई सदियों पहले ही शुरू हो चुकी थी।

ऐसा माना जाता है कि 18वीं-12वीं शताब्दी ईसा पूर्व में चीन में गुलामी का उल्लेख मिलता है। भारत के प्राचीन ग्रंथ ‘मनुस्मृति’ में भी दास प्रथा का उल्लेख मिलता है। मुगलों के शासन काल में भारत में दास प्रथा में अत्यधिक वृद्धि हुई। यहां तक ​​कि किन्नरों को गुलाम बनाने की क्रूर प्रथा भी शुरू हो गई। यह प्रथा भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना के बाद भी लंबे समय तक जारी रही।

भारत में ही नहीं विश्व के अनेक देशों में अनादि काल से दास प्रथा प्रचलित रही है। मानव समाज में जितने भी संस्थान हैं, उनमें सबसे भयानक है गुलामी। यद्यपि चौथी शताब्दी ईसा पूर्व भारत में, मेगस्थनीज ने लिखा है कि भारत में कोई दासता नहीं है, हालांकि, कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ और मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेख प्राचीन भारत में ‘दासता’ के अस्तित्व का संकेत देते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 650 AD से 1905 AD के दौरान, बाईस करोड़ से अधिक लोगों को इस्लामिक साम्राज्य को बेच दिया गया था। 15वीं शताब्दी में अफ्रीकी भी इस अनैतिक व्यापार में शामिल हो गए। वर्ष 1867 में, लगभग 60 मिलियन लोगों को बंधक बना लिया गया और अन्य देशों में दास के रूप में बेच दिया गया।

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