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साइकिल का आविष्कार किसने किया था और कब किया..

हम इस आर्टिकल मे साइकिल का आविष्कार किसने किया था और कब किया.. इन सभी सवालों की विस्तार मे जानकारी लेंगे तथा हम आपके सामने संक्षेप मे साइकिल का इतिहास भी रखेंगे ताकि आपको पूरी और सटीक जानकारी मिले. आप जानते होंगे की दुनियाभर मे साइकिल का इस्तेमाल होता है. इसके कई कारण है की आज भी साइकिल की मांग कम नहीं है. हालांकि बदलते वक्त के साथ इसके उपयोग मे कमी आई है लेकिन इसका महत्व बढ़ता जा रहा है.

साइकिल का आविष्कार किसने किया था और कब किया
शुरुवाती दौर की साइकिल

आज के दिनों मे जहा एयर पॉलुषण का कारण पेट्रोल डिजेल के वाहन बन चुके है, इसके विकल्प के तौर पर कम अंतर के लिए साइकिल को प्राथमिकता देने को कहा जा रहा है. वही दूसरी तरफ बढ़ते वजन को कंट्रोल करने के लिए साइकिलींग को कारगर एक्सर्साइज़ माना जाता है. इससे किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता है और ये काफी किफायती और सस्ता पड़ता है. साथ मे साइकिल जैसा वाहन जो बाकी वाहनों के मुकाबले बेहद सस्ता है और आप इसे बिना कोई डाक्यमेन्ट और ड्राइविंग लाइसन्स के खरीद सकते हो.

आज के समय मे जहा एक तरफ इलेक्ट्रिकल वाहनों का समय आ चुका है. जो प्रदूषण नहीं करते है लेकिन सस्ते और किफायती नहीं है. ऐसे मे साइकिल का महत्व और उपयोग शायद आने वाले कई दशकों तक कम नहीं होगा. इसीलिए सभी देशों की सरकारे, पर्यावरण संस्थाये, एनजीओ आदि सभी आपको सामान्य तौर पर साइकिल का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह देते है.

आज के मॉडर्न साइकिल को देखकर आपको शायद ऐसा लगता होगा की पहले भी यह इतनी ही कंफरटेबल या सुव्यवस्थित अवस्था मे आसानी के साथ चलती होगी, तो आपकी यह गलतफहमी है. आज से लगभग 100 साल पहले इसे किसी तरह से सुव्यवस्थित चलने वाला सुचारु रूप से वाहन कहना मुश्किल है. पुरानी साइकिल की तस्वीरे देखके लगता है की तब के वक्त मे इसे चलाने मे काफी क्रेज नजर आता था क्युकी इसे चलना किसी चुनौती से कम नहीं था.

साइकिल का आविष्कार किसने किया था

साइकिल का आविष्कार किसने किया था और कब किया Karl Von Drais

लेकिन मुख्य तौर पर इसके आविष्कारक जर्मन प्रोफेसर Karl Von Drais को कहा जा सकता है. उन्होंने लगभग 23 किलो वजन की लकड़ी की बनी साइकिल बनायी थी. इसको चलने के लिए इसपर बैठकर पांव से धकेलकर आगे की तरफ़ बढ़ा जाता था. आजकी साइकिल की नजर से यह किसी भी सूरत मे सुविधजनक नहीं थी. लेकिन उस वक्त इस वाहन का काफी क्रेज लोगों के दिमाग मे सवार था. उस वक्त इसे ‘रनिंग मशीन’ ‘हॉबी हॉर्सेस’ ‘ड्रेसियेन’ आदि नामों से बुलाया जाता था. वक्त के साथ इसमे काफी बदलाव होते गए. लेकिन उस वक्त ये वाहन महंगा होने के कारण सुखी और सपन्न लोग ही इसे खरीद पाते थे.

साइकिल का आविष्कार कैसे और कब हुआ

हर आविष्कार के पीछे कोई बड़ा नाम छिपा होता है लेकिन इस साइकिल के आविष्कार के पीछे कई नाम छिपे हुए है. इनमे से किसी एक पर इतिहासकार एकमत नहीं है. ब्रिटेनिका इनसाइक्लोपीडिया के मुताबिक सन् 1492 में लियोनार्दो द विंची की पेंटिंग में साइकिल की पहली झलक मिली थी. इस पेंटिंग के डेढ़ सौ साल बाद फ्रांस में चार पहियों वाली मशीन का आविष्कार हुआ.

1860 के और मे दो पहिया वाहनों को बाइसिकल कहा जाता था, बाइसिकल’ एक फ्रांसिसी शब्द है. 1870 मे लकड़ी की जगह धातु की साइकिल बनाने लगी. इसमे साइकिल का अगला पहिया पिछले पहिये से बड़ा होता था. इसमे पीछे बड़ा पहिया होने का कारण जीतना अगला पहिया जितना बड़ा होगा, उतनी ही साइकिल की स्पीड ज्यादा होगी यह धारणा थी.

साइकिल का आविष्कार किसने किया था और कब किया | 200 साल मे हुआ बदलाव
cycle revolution

बड़े पहिया की साइकिल बिल्कुल सुरक्षित नहीं थी. यह अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण इसे ‘डेंजर टॉय’ यानी खतरनाक खिलौना भी कहा गया. फिर कुछ सालों बाद इसमे पैडल लगाया गया. जिससे साइकिल तेजी के साथ चले. कुछ इतिहासकार के मुताबिक 1812 से 1878 के बीच पैडल के आविष्कार का श्रेय स्कॉटलैंड के लुहार किर्कपैट्रिक मैकमिलन को देते है. लेकिन कुछ इतिहासकार इसका श्रेय फ्रांसीसी आविष्कारकों को फ्रन्ट के पहियों मे पैडल लगाने के लिए देते है.

साइकिल मे पैडल लगाने के बाद भी यह तेजी के साथ नहीं चलती थी इसका मुख्य कारण साइकिल मे चैन का न होना था. इसीलिए वर्ष 1880 मे चैन का आविष्कार हुआ, इसका श्रेय मैनचेस्टर, इंग्लैंड के निवासी हैंस रोनाल्ड को जाता है. 1890 के बाद साइकिल को नई डिजाइन और आधुनीक स्वरूप प्राप्त हुआ था. इसमे आज के जैसे बराबर बैलन्स के दो पहिये, इन पहियों और पैडल की बीच चैन और आगे स्टियरिंग लगने लगा था. यह अभी सुविधाजनक बन चुका था.

तो आपको जवाब मिल गया होगा कि साइकिल का आविष्कार किसने किया था और कब हुआ.. हमारे भारत देश मे साइकिल अंग्रेजों के जमाने मे आई थी. भारत मे साइकिल बनाने की शुरुवात मुंबई की Hind Cycle कंपनी ने 1942 मे किया था. 1947 में आजादी के बाद खासतौर पर 1960 से लेकर 1990 के दरम्यान भारत में ज्यादातर लोगों के पास साइकिल थी. साइकिल से यातायात करना सबसे आसान और किफायती साधन था. यातायात के साधनों की कमी के चलते गावों से लेकर शहरों तक सब्जीया, दूध, डाक सुविधा के चलते आज भी साइकिल का प्रयोग होता है.

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