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भू संरक्षण के उपाय क्या है

मृदा संरक्षण से तात्पर्य उन विधियों से है जो मिट्टी को उसके स्थान से हटाने से रोकती हैं। विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए हैं। इस लेख में हम आपको, भू संरक्षण के उपाय क्या है यह बताएंगे।

भू संरक्षण के उपाय क्या है बताइए

भू संरक्षण के उपाय क्या है बताइए

भू संरक्षण के कई उपाय है, जिनमें वन संरक्षक, वृक्षारोपण, बाढ़ नियंत्रण, नियोजित चराई, बांध का निर्माण, भूमि सुधार आदि विषय शामिल है। इसकी विस्तृत जानकारी इस प्रकार है:

वन संरक्षण

वन वृक्षों की अंधाधुंध कटाई मृदा अपरदन का प्रमुख कारण है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी की सामग्री को एक साथ रखती हैं। यही कारण है कि सरकारों ने जंगलों को ‘सुरक्षित’ घोषित कर दिया है और इन जंगलों में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। मृदा संरक्षण की यह विधि सभी प्रकार के भूभाग के लिए उपयुक्त है। कहा जाता है कि वन वर्षा ‘दूत’ लाते हैं। वे मिट्टी के निर्माण की प्रक्रिया को तेज करते हैं।

वृक्षारोपण

नदी घाटियों, बंजर भूमि और पहाड़ी ढलानों पर पेड़ लगाना मृदा संरक्षण का एक अन्य तरीका है। इससे इन क्षेत्रों में मिट्टी का कटाव कम होता है। मरुस्थलीय सीमांत क्षेत्रों में पवन-क्षरण को नियंत्रित करने के लिए वृक्षारोपण एक प्रभावी तरीका है।

बाढ़ नियंत्रण

बरसात के दिनों में नदियों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। इससे मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है। बाढ़ नियंत्रण के लिए नदियों पर बांध बनाए गए हैं। वे मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करते हैं। नहरों और जल संरक्षण के अन्य सुनियोजित तरीकों से नदियों के पानी को सूखा प्रवण क्षेत्रों में मोड़कर बाढ़ को भी रोका जा सकता है।

नियोजित चराई

अत्यधिक चराई के कारण पहाड़ी ढलानों की मिट्टी ढीली हो जाती है और पानी इन ढीली मिट्टी को आसानी से धो देता है। इन क्षेत्रों में नियोजित चराई से वनस्पति आवरण को बचाया जा सकता है। इस प्रकार इन क्षेत्रों के मृदा अपरदन को कम किया जा सकता है।

बांध का निर्माण

वाहिनी अपरदन से प्रभावित भूमि में बांध या बैरियर बनाकर मृदा अपरदन को रोका जा रहा है। यह विधि न केवल मिट्टी के कटाव को रोकती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संसाधनों के संरक्षण और भूमि को समतल करने में भी मदद करती है।

भूमि सुधार

खुदाई की गई भूमि को पानी से समतल करके मिट्टी के कटाव को भी रोका जा सकता है। मृदा संरक्षण की यह विधि नदी घाटियों और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है। हमारे देश में चंबल और यमुना नदियों की खुदाई वाली भूमि वाले विस्तृत क्षेत्रों को इस विधि से समतल किया गया है।

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