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भारतीय मानसून को प्रभावित करने वाले कारक

भारत में पवन प्रणाली के मौसमी उत्क्रमण को अरब व्यापारियों ने ‘Monsoon’ नाम दिया था। भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले कारकों में भूमि और पानी के गर्म होने और ठंडा होने की दर में अंतर, अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का विस्थापन, मेडागास्कर के पूर्व में उच्च दबाव वाले क्षेत्रों की उपस्थिति, तिब्बती पठार का गर्म होना, पूर्वी जेट धारा प्रवाह और अल-नीनो आदि घटना शामिल हैं। इस लेख में हम भारतीय मानसून को प्रभावित करने वाले कारक क्या है, इन कारकों को समझेंगे।

भारतीय मानसून को प्रभावित करने वाले कारक

शीतकाल में हवाएँ उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर चलती हैं, जिसे शीत मानसून कहते हैं। दूसरी ओर, गर्मी के मौसम में हवाएं विपरीत दिशा में चलती हैं, जिसे दक्षिण-पश्चिम मानसून या ग्रीष्म मानसून कहा जाता है। चूंकि इन हवाओं ने अतीत में व्यापारियों को नौकायन में मदद की थी, इसलिए उन्हें व्यापारिक हवाएं या ‘ट्रेड विंड’ भी कहा जाता है।

मानसून को प्रभावित करने वाले कारक

1. हिंद महासागर द्विध्रुव

हिंद महासागर के द्विध्रुव के दौरान, हिंद महासागर का पश्चिमी भाग पूर्वी भाग की तुलना में अधिक गर्म या ठंडा रहता है। पश्चिमी हिंद महासागर के गर्म होने का भारत के मानसून पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि शीतलन का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

2. चक्रवात निर्माण

चक्रवातों के केंद्र में बहुत कम दबाव की स्थितियां पाई जाती हैं, जिसके कारण इसके चारों ओर की हवाएं इसके केंद्र की ओर तेजी से चलती हैं। जब ऐसी स्थितियां सतह के पास विकसित होती हैं, तो वे मानसून को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। अरब सागर में बनने वाले चक्रवात बंगाल की खाड़ी के चक्रवातों की तुलना में अधिक प्रभावी होते हैं क्योंकि भारतीय मानसून प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अरब सागर की ओर प्रवेश करता है।

3. अल नीनो

वैज्ञानिकों के अनुसार यदि दक्षिण अमेरिका के पास प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के आसपास समुद्र की सतह अचानक गर्म होने लगे, खासकर पेरू के तट में, तो अल-नीनो की स्थिति बन जाती है। यदि तापमान में यह वृद्धि 0.5 डिग्री से 2.5 डिग्री के बीच होती है तो यह मानसून को प्रभावित कर सकता है। इससे मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में वायुदाब कम होने लगता है। इसका असर यह होता कि भूमध्य रेखा के आसपास व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ने लगतीं। ये हवाएँ मानसूनी हवाएँ हैं जो भारत में वर्षा लाती हैं।

4. ला नीना

प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह कभी-कभी उपरोक्त स्थान पर ठंडी होने लगती है। ऐसे में अल-नीनो का ठीक उल्टा होता है, जिसे ला-नीना कहते हैं। ला निया के बनने से वायुदाब बढ़ जाता है और व्यापारिक पवनें तेज हो जाती हैं, जिनका भारतीय मानसून पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, 2009 में मानसून पर एल नियो के प्रभाव के कारण कम वर्षा हुई थी, जबकि 2010 और 2011 में ला निया के प्रभाव के कारण अच्छी वर्षा हुई थी।

5. जेट धारा

जेट धाराएँ पृथ्वी के ऊपर उच्च गति वाली हवाएँ हैं, जो सीधे भारतीय मानसून को प्रभावित करती हैं।

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