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भारत के प्रथम विधि व शिक्षा मंत्री कौन थे

आप जानते ही होंगे की भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद और प्रथम उप राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधा कृष्णन थे। इसके साथ आप भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी जानते होंगे। लेकिन क्या आप भारत के प्रथम विधि व शिक्षा मंत्री कौन थे जानते है? अगर नहीं तो हम इस आर्टिकल में उनके बारे में थोड़ी विस्तृत जानकारी देने जा रहे है जो आपको जरूर पसंद आएगी।

भारत के प्रथम विधि व शिक्षा मंत्री कौन थे

भारत के प्रथम विधि व शिक्षा मंत्री कौन थे

भारत के प्रथम विधि व शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आज़ाद थे। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान और राजनीतिज्ञ थे। इसके साथ ही वे एक कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पद संभाला। उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों का समर्थन किया। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम किया, और एक अलग मुस्लिम राष्ट्र (पाकिस्तान) के सिद्धांत का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओं में से थे।

अबुल कलाम आज़ाद एक क्रांतिकारी

उन्होंने खिलाफत आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। 1923 में, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने। वह 1940 और 1945 के बीच कांग्रेस के अध्यक्ष थे। स्वतंत्रता के बाद, वह 1952 में भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर जिले से सांसद चुने गए और भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने।

भारत के प्रथम विधि व शिक्षा मंत्री कौन थे

वह धारासन सत्याग्रह के एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी थे। वह 1940-45 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे, जिसके दौरान भारत छोड़ो आंदोलन हुआ था। अन्य प्रमुख कांग्रेसी नेताओं की तरह उन्हें भी तीन साल जेल में बिताने पड़े। स्वतंत्रता के बाद वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और उनके सबसे अविस्मरणीय कार्यों में से एक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना थी।

मां अरबी और पिता एक फारसी

मौलाना आजाद अफगान उलेमाओं के परिवार से थे जो बाबर के समय में हेरात से भारत आए थे। उनकी मां अरबी मूल की थीं और उनके पिता मोहम्मद खैरुद्दीन एक फारसी थे। मोहम्मद खैरुद्दीन और उनका परिवार 1857 में कलकत्ता छोड़कर भारतीय स्वतंत्रता के पहले आंदोलन के दौरान मक्का चला गया। वहां मोहम्मद खैरुद्दीन अपनी होने वाली पत्नी से मिले।

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माँ का बचपन में ही देहांत

मोहम्मद खैरुद्दीन 1890 में भारत लौट आए। मुहम्मद खैरुद्दीन ने कलकत्ता में एक मुस्लिम विद्वान के रूप में ख्याति प्राप्त की। आजाद जब महज 11 साल के थे, तब उनकी मां का देहांत हो गया था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा इस्लामी तरीकों से हुई। उन्हें घर पर या मस्जिद में उनके पिता और बाद में अन्य विद्वानों द्वारा पढ़ाया जाता था। उन्होंने इस्लामी शिक्षा के अलावा अन्य दर्शनशास्त्र, इतिहास और गणित में भी शिक्षा प्राप्त की। आजाद ने उर्दू, फारसी, हिंदी, अरबी और अंग्रेजी भाषाओं में दक्षता हासिल की।

तेरह साल की उम्र में शादी

तेरह साल की उम्र में उन्होंने जुलेखा बेगम से शादी कर ली। जेल से रिहा होने के बाद, वह जलियांवाला बाग हत्याकांड के विपक्षी नेताओं में से एक थे। इसके अलावा वह खिलाफत आंदोलन के मुखिया भी थे। उन्होंने गांधी के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। उनका उद्देश्य मुस्लिम युवाओं को क्रांतिकारी आंदोलनों की ओर प्रोत्साहित करना और हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर देना था।

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