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भारत का पहला उपग्रह कौनसा है और इसे कब लॉन्च किया गया था

क्या आप जानते है भारत का पहला उपग्रह कौनसा है और इसे कब लांच किया गया था? तो इस सवाल के जबाव के साथ कुछ और भी रोचक जानकारी देने की हम कोशिश करेंगे. पहले आपको यह जान लेना आवश्यक है की कृत्रिम उपग्रह (सॅटेलाइट) कीस होता है? बता दे की ये ऐसे कृत्रिम उपग्रह होते है जो पृथ्वी के निश्चित कक्षा मे घूमते रहते है या कहे तो परिक्रमा करते है. जिसका मुख्य इस्तेमाल मौसम की जानकारी, सुरक्षा, संचार, टीवी नेटवर्क और तकनीकी इस्तेमाल मे किया जाता है.

आपने भी कभी नोटिस किया होगा, की जब मौसम खराब होता है तब आपके घर के टीवी नेटवर्क चले जाते है या कमजोर नेटवर्क के कारण अच्छे से तस्वीरे नहीं दिखती. इसकी वजह यही है की निश्चित कक्षा पर मौजूद सॅटेलाइट से खराब मौसम के कारण नेटवर्क मे बाधा उत्पन्न हो रही है, इसलिए आप टीवी पर तस्वीरे नहीं देख पाते.

आपको तो यह पता ही होगा की हमारे भारत देश की स्पेस एजेंसी ISRO है. ISRO का लॉंग फॉर्म Indian Space Research Organisation होता है. यह अपने देश की सरकारी स्पेस रिसर्च संस्था है, जो स्पेस रिसर्च के साथ रॉकेट लॉन्च का भी काम करती है. आपको बता दे की ISRO 104 उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजकर जागतिक पराक्रम प्रस्थापित किया था. यह तक की चाँद से लेकर मंगल तक ISRO सॅटेलाइट भेज चुकी है. हर भारतीय को ISRO पे गर्व होना चाहिए. अभी इतने बड़े रिकार्ड बनाने वाली संस्था ने पहला उपग्रह कौनसा है लॉन्च किया था, यह आपको जानना चाहिए.

भारत का पहला उपग्रह कौनसा है और इसे कब लॉन्च किया गया था
भारत का पहिला उपग्रह आर्यभट्ट

भारत का पहला उपग्रह कौनसा है

भारत का पहिला उपग्रह आर्यभट्ट है, जिसे 19 अप्रैल 1975 को छोड़ा गया था. भारत ने तब सोवियत संघ (रूस) की स्पेस एजेंसी इंटरकॉसमॉस की मदद से इसे प्रक्षेपित किया था. उस वक्त भारत की स्पेस रिसर्च संस्था बालावस्था मे थी, ऐसे हमने कोई तकनीक विकसित नहीं की जिससे उस वक्त देश अपने दम पर कोई कृत्रिम उपग्रह लॉन्च कर पाए. लेकिन आज ISRO जागतिक लेवल की विश्वसनीय स्पेस रिसर्च संस्था बन चुकी है.

भारत के उस वक्त के पंतप्रधान इंदिरा गांधी ने उपग्रह का नामकरण किया था. उन्होंने भारत के 5 वीं शताब्दी के खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट को उपग्रह का नाम समर्पित किया. जिसका वजन 360 किलोग्राम का था.

इंडिया के पहले उपग्रह का नामकरण उस समय की प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने किया था. इन्होने इसका नाम भारत के महान खगोलशास्त्र और गणितज्ञ आर्यभट्ट पर रखा था इस उपग्रह का वजन 360 किलोग्राम था.

इस कृत्रिम उपग्रह को भेजने के 5 दिन बाद इससे संपर्क टूट गया, और ये उपग्रह 17 साल बाद 11 फरवरी 1992 को पृथ्वी के वातावरण में आकर नष्ट हो गया. इस उपग्रह को भेजने का प्रमुख उद्देश्य स्पेस रिसर्च एवम एक्सपेरिमेंट करना था, जो असफल रहा . ऐसा माना जाता है की उपग्रह में उर्जा संचालन मे तकनीकी खामी आ गई थी, इसके कारण ये सब हुआ. हम हर कमी से कुछ ना कुछ सीखते है, यही असफलता ही ISRO को सफलता की ऊंचाई पर ले गई. अभी ISRO जागतिक दर्जे की वो स्पेस रिसर्च संस्था है, जो अमेरिका जैसे बड़े विकसित देशों के भी सैटेलाइट अंतरिक्ष मे भेज चुकी है.

पिछले 4 दशक मे ISRO एक से बढ़कर एक रिकार्ड बना रहा है, इसके साथ अंतरिक्ष विज्ञान मे दुनिया को राह बता रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान अबतक 110 भारतीय और 328 विदेशी उपग्रह भेज चुका है. जिनमेसे अधिकर मिशन सफल रहे है. जिससे इसरो को जागतिक पहचान और प्रसिद्धि मिली है.

भारत का दूसरा उपग्रह भास्कर था जो 7 जून 1979 को छोड़ गया था. जिसका वजन 445 किलो इतना था. जो लॉन्च के बाद पृथ्वी के कक्षा मे स्थापित हुआ. इसके बाद भारत की तकनीक से बनी रोहिणी उपग्रह सीरीज को लॉन्च किया गया. रोहिणी श्रृंखला में चार उपग्रह थे, जो सभी भारतीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन द्वारा लॉन्च किए गये थे और जिसमे से तीनको सफलता मिली. इनको भारत-निर्मित प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 द्वारा लॉन्च किया गया.

तो आपको पता चल गया कि भारत का पहला उपग्रह कौनसा था. और इस कृत्रिम उपग्रह को कब लॉन्च किया गया था. आपको बात दे की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना 15 अगस्त 1969 में की गई थी. इसका श्रेय वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई को जाता है क्योंकि इनके प्रयासों और सकल्प के चलते ही ISRO की स्थापना हुई. इसका मुख्यालय बंगलौर में है. इसरो के हर प्रयास से देश का नाम रोशन हुआ है और आगे भी देश के साथ सारी दुनिया को ये मार्गदर्शन करता रहेगा.

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