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भारत का सबसे पहला उपग्रह कौन सा है और इसे कब लॉन्च किया गया था

आपने भी कभी नोटिस किया होगा कि जब मौसम खराब होता है, तो तुरंत आपके घर का टीवी नेटवर्क चला जाता है या कमजोर नेटवर्क के कारण तस्वीरें ठीक से नहीं दिखाई नहीं देती। इसका कारण, पृथ्वी से निश्चित कक्षा में मौजूद सैटेलाइट से खराब मौसम के कारण नेटवर्क में बाधा उत्पन्न होना है। तो आप समझ सकते हैं की सैटेलाइट यानि कृत्रिम उपग्रह का क्या महत्व होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला उपग्रह कौन सा है (Which Is The First Satellite Of India) और इसे कब लॉन्च किया गया था? तो इस सवाल के जवाब के साथ हम कुछ और रोचक जानकारी देने की कोशिश करेंगे।

भारत का सबसे पहला उपग्रह कौन सा है

सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि कृत्रिम उपग्रह (Satellite) क्या है? आपको बता दें कि ये कृत्रिम उपग्रह हैं जो पृथ्वी की एक निश्चित कक्षा में घूमते रहते हैं या कहें तो परिक्रमा करते हैं। जिसका उपयोग मुख्य रूप से मौसम की जानकारी, सुरक्षा, संचार, टीवी नेटवर्क और प्रौद्योगिकी के उपयोग में किया जाता है।

भारत का पहला उपग्रह कौन सा है

भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट है, जिसे 19 अप्रैल 1975 को लॉन्च किया गया था। भारत ने तब इसे सोवियत संघ (रूस) की अंतरिक्ष एजेंसी इंटरकॉसमॉस की मदद से लॉन्च किया था। उस समय भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान अपनी बाल्यावस्था में था। तब भारत ने कृत्रिम उपग्रह को प्रक्षेपित करने की तकनीक विकसित नहीं की थीं। लेकिन आज ISRO वैश्विक स्तर का एक विश्वसनीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन बन गया है।

Photograph of India's first satellite Aryabhata
Photograph of India’s first satellite Aryabhata

भारत की तत्कालीन पंतप्रधान इंदिरा गांधी ने उपग्रह का नाम रखा था। उन्होंने उपग्रह का नाम भारत के 5वीं शताब्दी के खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट को समर्पित किया। जिसका वजन 360 किलो था। इस कृत्रिम उपग्रह को भेजने के 5 दिन बाद इसका संपर्क टूट गया और यह उपग्रह 17 साल बाद 11 फरवरी 1992 को पृथ्वी के वायुमंडल में नष्ट हो गया। इस उपग्रह को भेजने का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष अनुसंधान और प्रयोग करना था, जो असफल रहा।

भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट

माना जा रहा है कि सैटेलाइट में बिजली संचालन में तकनीकी खामी थी, जिसके चलते यह सब हुआ। हम हर कमी से कुछ न कुछ सीखते हैं, यही असफलता ISRO को सफलता के शिखर पर ले गई। अभी ISRO विश्वस्तरीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है, जिसने अमेरिका जैसे बड़े विकसित देशों के उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में भेजा है।

भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी का नाम ISRO है। ISRO का लॉंग फॉर्म ‘Indian Space Research Organisation’ है। यह भारत का सरकारी अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है, जो अंतरिक्ष अनुसंधान के साथ-साथ रॉकेट लॉन्च का काम भी करता है। आपको बता दें कि ISRO ने अंतरिक्ष में 104 उपग्रह भेजकर सफलतापूर्वक कॉस्मिक करतब स्थापित किया है। इसने इसरो के उपग्रहों को चंद्रमा से मंगल ग्रह पर भी भेजा है।

Photo showing the configuration of the ground station at Sriharikota
Photo showing the configuration of the ground station at Sriharikota

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसका श्रेय वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई को जाता है क्योंकि उनके प्रयासों और दृढ़ संकल्प के कारण ही ISRO की स्थापना हुई थी। इसका मुख्यालय बैंगलोर में है। ISRO के हर प्रयास से देश का नाम रोशन हुआ है और यह देश के साथ-साथ पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करता रहेगा।

Photograph showing Aryabhata in the disassembled form
Photograph showing Aryabhatta in the disassembled form

पिछले 4 दशकों में ISRO एक से बढ़कर एक रिकॉर्ड बना रहा है, इसके साथ ही यह अंतरिक्ष विज्ञान में दुनिया को राह दिखा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान अब तक 110 भारतीय और 328 विदेशी उपग्रह भेज चुका है। जिनमें से अधिकांश मिशन सफल रहे हैं। जिससे ISRO को विश्व स्तर पर पहचान और प्रसिद्धि मिली है।

भारत का दूसरा उपग्रह ‘भास्कर’ (Bhaskara ) था जिसे 7 जून 1979 को लॉन्च किया गया था। जिसका वजन 445 किलो इतना था। जिसे लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद भारत की तकनीक से बनी रोहिणी सैटेलाइट सीरीज को लॉन्च किया गया। रोहिणी सीरीज में चार उपग्रह थे, जिनमें से सभी भारतीय उपग्रह प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किए गए थे और जिनमें से तीन सफल रहे थे। उन्हें भारत निर्मित प्रक्षेपण यान SLV-3 द्वारा लॉन्च किया गया था।

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