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अशफाकउल्ला खान कौन थे? उनकी मृत्यु कैसे हुई

वर्ष 1920 में महात्मा गांधी ने भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू किया। लेकिन साल 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद महात्मा गांधी ने आंदोलन वापस ले लिया। इस स्थिति में खान समेत कई युवा परेशान हो गए। इसके बाद, अशफाकउल्ला खान ने समान विचारधारा वाले स्वतंत्रता सेनानियों से मिलकर एक नया संगठन बनाने का फैसला किया और वर्ष 1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया। अगर आप नहीं जानते की, अशफाकउल्ला खान कौन थे और Ashfaqulla Khan की मृत्यु कैसे हुई थी तो हम इस आर्टिकल में इसके बारे में बताने जा रहे है।

अशफाकउल्ला खान कौन थे और Ashfaqulla Khan की मृत्यु कैसे हुई थी

अशफाकउल्ला खान कौन थे

अशफाक उल्लाह खान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक स्वतंत्रता सेनानी थे। खान का जन्म ब्रिटिश भारत के शाहजहांपुर में शफीकुल्लाह खान और मजरुनिसा के घर हुआ था। उनका जन्म एक मुस्लिम पठान परिवार के खैबर जनजाति में हुआ था। वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटा था। खान और उनके सहयोगियों का काम हिंदी फिल्म रंग दे बसंती (2006) में फिल्माया गया था, जिसमें खान की भूमिका कुणाल कपूर ने निभाई थी।

Ashfaqulla Khan और काकोरी कांड

इंडियन सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सभी क्रांतिकारियों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने, हथियार खरीदने और अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक गोला-बारूद इकट्ठा करने के लिए 8 अगस्त 1925 को शाहजहांपुर में एक बैठक की। काफी मशक्कत के बाद ट्रेन में जा रहे सरकारी खजाने को लूटने का कार्यक्रम बनाया गया। 9 अगस्त 1925 को अशफाकउल्ला खान ने अपने क्रांतिकारी सहयोगियों राम प्रसाद बिस्मिल, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और कई अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर लखनऊ के पास काकोरी में ट्रेन से जाने वाली ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूट लिया।

ट्रेन लूटने के एक महीने बाद भी कोई लुटेरा गिरफ्तार नहीं हो सका। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने विस्तृत जांच का जाल बिछा दिया था। 26 अक्टूबर 1925 की एक सुबह, बिस्मिल को पुलिस ने पकड़ लिया और खान ही अकेला था जिसे पुलिस नहीं ढूंढ पाई। वह छिपकर बिहार से बनारस चले गए, जहां उन्होंने दस महीने तक एक इंजीनियरिंग कंपनी में काम किया।

अशफाक उल्ला खान की मृत्यु कैसे हुई

अशफाकउल्ला खान ने अपने एक पठान मित्र की मदद ली, जो पहले उनका क्लासमेट था। दोस्त ने उन्हे धोखा दिया और पुलिस को अपना ठिकाना बताया और 17 जुलाई 1926 की सुबह पुलिस उनके घर आई और उन्हे गिरफ्तार कर लिया। खान को फैजाबाद जेल में रखा गया और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उनके भाई रियासतुल्लाह खान उनके कानूनी वकील थे। काकोरी कांड में बिस्मिल, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह के साथ अशफाक खान को मौत की सजा सुनाई गई थी। खान को 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी दे दी गई थी। इस तरह उनकी मृत्यु हुई।

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