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अकाल मृत्यु के बाद क्या होता है | मरने के बाद की कहानी

बचपन में बच्चों को सही राह दिखाने के लिए घर के बड़े-बुजुर्ग स्वर्ग-नरक की कहानियां सुनाया करते थे, लेकिन असल में किसी ने इन्हे नहीं देखा। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है, इसका उल्लेख है और सभी लोकों की बात की गई है। बच्चों को सही राह दिखाने के लिए घर के ज्यादातर बुजुर्ग स्वर्ग-नर्क की कहानियां सुनाते है और कहते है कि अच्छे कर्म करने वालों को स्वर्ग मिलता है और बुरे काम करने वालों को नर्क मिलता है। इसीलिए इस लेख में हम, सामान्यतः मरने के बाद क्या होता है और अकाल मृत्यु के बाद क्या होता है इसे जानेंगे।

अकाल मृत्यु के बाद क्या होता है? जानिये मरने के बाद की कहानी

अकाल मृत्यु के बाद क्या होता है

अकाल मृत्यु के बाद क्या होता है, इसका वर्णन गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो आत्मा समय से पहले मरती है, उन सभी आत्माओं में जो आत्मा आत्महत्या करती है, वह सबसे दर्दनाक अवस्था में पहुंच जाती है। और अपनी सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अर्थात् भूख, प्यास, यौन सुख, क्रोध, अपराधबोध, लोभ, वासना आदि की पूर्ति के लिए, आत्मा, जो अकाल मृत्यु को प्राप्त हो चुकी है, तब तक अंधेरे में भटकती रहती है जब तक कि उसका ईश्वर द्वारा निर्धारित जीवन चक्र पूरा नहीं हो जाता।

अकाल मृत्यु क्यों होती है

लेकिन अब यहां सवाल उठता है कि किसी भी प्राणी की अकाल मृत्यु क्यों होती है? तो दोस्तों आपको बता दूं कि इसका वर्णन गरुड़ पुराण में भी किया गया है, जिसके अनुसार सृष्टिकर्ता द्वारा तय की गई मृत्यु को सही माना गया है; जो की प्राकृतिक होती है। प्राचीन काल से ही वेदों में कहा गया है कि मनुष्य सौ वर्ष तक जीवित रहता है, परन्तु निन्दा करने वाले व्यक्ति का शीघ्र ही नाश हो जाता है, जो वेदों के ज्ञान के अभाव में वंश के गुणों का पालन नहीं करता है।

जो आलस्य के कारण कर्म का त्याग करता है, जो सदा त्याग के कर्म का सम्मान नहीं करता है, जो किसी भी घर में भोजन करता है और जो स्त्री से आसक्त है, ऐसे अन्य महान दोषों से पुरुष का जीवन छोटा हो जाता है। एक नास्तिक, अशुद्ध, जो मंगल का त्याग करता है, एक देशद्रोही, एक असत्य ब्राह्मण की मृत्यु उसे अकाल में यमलोक ले जाती है।

मरने के बाद क्या होता है

गरुण पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद दो यमदूत आत्मा को लेने आते हैं और वे 24 घंटे के लिए ही आत्मा को अपने साथ ले जाते हैं। इन 24 घंटों में मृतक के परिजन दाह संस्कार और उसके शरीर के अन्य कार्य करते हैं। तब तक आत्मा को यमलोक में उस व्यक्ति द्वारा किए गए अच्छे-बुरे कर्मों को दिखाया जाता है। इसके बाद यमदूत आत्मा को वापस उसके घर छोड़ देते हैं।

13 दिनों तक आत्मा अपने ही घर में रहती है। जब मृत्यु के बाद 13 दिनों के अनुष्ठान पूरे हो जाते हैं, तो इसके बाद आत्मा को फिर से यमलोक ले जाया जाता है। रास्ते में तीन अलग-अलग दुनिया के रास्ते हैं। इसमें पहला मार्ग देवलोक का, दूसरा पितृलोक का और तीसरा नर्क का होता है। व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसका संसार निश्चित होता है और उसे उसके लिए निश्चित मार्ग पर भेजा जाता है।

इस लेख में हमने, मरने के बाद क्या होता है और अकाल मृत्यु के बाद क्या होता है इसे जाना। बाकी ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लेख पढ़े।

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