Menu Close

अभंग क्या है

मराठी भक्ति परंपरा की दो महत्वपूर्ण धाराएं, अभंग और हरिकथा, पिछले तीन सौ वर्षों में तमिलनाडु में अच्छी तरह फैल गई हैं। अभंग भारत के महाराष्ट्र के साथ दक्षिणी भाग में कन्नड़ और तेलुगु में भी पाए जाते हैं। अगर आप नहीं जानते की, अभंग क्या है तो हम इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

अभंग क्या है

अभंग क्या है

अभंग प्राचीन मराठी साहित्य में विकसित एक विशेष प्रकार की कविता है। महाराष्ट्र में वारकरी संप्रदाय के संतों द्वारा आध्यात्मिकता के लिए इस प्रकार की कविता का इस्तेमाल किया गया था। संत नामदेव, संत ज्ञानेश्वर, संत एकनाथ, आदि संतों की भक्ति कविता मुख्य रूप से अभंग रूप में है।

अभंग विट्ठल या विठोबा की स्तुति में गाए जाने वाले छंद हैं। 13वीं शताब्दी के दौरान महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के संतों द्वारा क्षेत्रीय भाषा में गाए गए छंदों को अभंग के रूप में जाना जाता है। यह एक तरह से हिंदी के छंदों की तरह है। मोटे और समान छंदों के विपरीत, अभंग में मात्राओं के बजाय शब्दांशों की संख्या की गणना की जाती है। अक्षरों की संख्या का कड़ाई से पालन नहीं किया जाता है, बल्कि यह कहना सही होगा कि उच्चारण की सुविधा के अनुसार अक्षरों की संख्या बढ़ाई या घटाई जाती है।

अभंग दो प्रकार के होते हैं – चार चरणों के और दो चरणों के। चार चरणों वाले अभंग के पहले तीन चरणों में 6-6 अक्षर होते हैं जबकि अंतिम चार अक्षरों में। इसके साथ ही दूसरे और तीसरे चरण में यमक का पुट होता है। रही बात चौथा चरण की तो वह अभंग को पूर्णता प्रदान करता है-

काय करूँ आता, धरुनिया भीड़
नि:शंक हे तोंड, वाजविले।।
नव्हे जगी कोणी, मुक्तियांचा जाण
सार्थक लाजुण, नव्हे हित।।

दो चरणों वाले अभंग के प्रत्येक चरण में 8-8 अक्षर होते हैं और अंत में यमक होता है-

जे का रंजले गांजले। त्यासी म्हणे जो आपुले।।

सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी।। कर कटेवरी । ठेवोनिया।।

13वीं सदी के संत नामदेव-ज्ञानेश्वर से लेकर 17वीं सदी के संत नीलोबा तक कई संतों ने विशाल अभंगराचन किया है। फिर भी, यह संत तुकाराम ही थे जिन्होंने इस शैली को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। कभी न भंग होने वाला इसका ही मतलब अभंग होता है। आधुनिक समय में भी महाराष्ट्र के साहित्यिक केशवसुत से लेकर मर्ढेकर-करंदीकर और अगली पीढ़ी के दिलीप चित्रे और अरुण कोलाटकर तक, कई कवियों ने अभंग की शैली को आगे बढ़ाया है।

यह भी पढे –

Related Posts

error: Content is protected !!